बच्चे के जन्म के बाद नई मांओं को स्तनपान से जुड़ी कई तरह की सलाह दी जाती हैं। इनमें एक आम धारणा यह भी है कि अगर मां को बुखार, सर्दी या खांसी हो जाए, तो उसे बच्चे को दूध नहीं पिलाना चाहिए। कई महिलाएं इस डर से स्तनपान रोक देती हैं कि कहीं उनका बच्चा भी बीमार न पड़ जाए। लेकिन क्या वाकई मां को बुखार होने पर बच्चे को स्तनपान कराना बंद कर देना चाहिए? इस सवाल पर स्त्री रोग विशेषज्ञ ने अहम जानकारी साझा करते हुए एक आम गलतफहमी को दूर किया है।
सोशल मीडिया पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनिया गुप्ता का एक वीडियो चर्चा में है। इसमें वह एक नई मां से पूछती हैं कि वह अपने बच्चे को मां का दूध पिलाने के बजाय ऊपर का दूध क्यों दे रही हैं। इस पर महिला बताती हैं कि उसे पिछले दिन से तेज बुखार है। उसे डर है कि अगर वह बच्चे को स्तनपान कराएगी, तो कहीं उसके बच्चे को भी बुखार न हो जाए। इसी आशंका के कारण वह बच्चे को अपना दूध पिलाने से बच रही है।
इस पर डॉक्टर बताती हैं कि बुखार होने पर स्तनपान रोक देना हर स्थिति में जरूरी नहीं है। सामान्य सर्दी-जुकाम और कई आम संक्रमणों के दौरान मां अपने बच्चे को स्तनपान जारी रख सकती है। मां के दूध में मौजूद पोषक तत्व और प्रतिरक्षी तत्व बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहारा देते हैं। इसलिए केवल बुखार होने के डर से स्तनपान बंद करने का फैसला नहीं करना चाहिए।
दरअसल, जब मां का शरीर किसी संक्रमण से लड़ता है, तो उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली उस संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती है। इनमें से कुछ एंटीबॉडी स्तन के दूध के जरिए बच्चे तक पहुंच सकती हैं। ये बच्चे की प्रतिरक्षा सुरक्षा में मदद करती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि स्तनपान कराने से बच्चा हर बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है। संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई और जरूरी सावधानियां भी महत्वपूर्ण हैं।
स्तनपान जारी रखने का एक और महत्वपूर्ण कारण मां के स्वास्थ्य से जुड़ा है। यदि मां अचानक दूध पिलाना बंद कर देती है या लंबे समय तक स्तनों से दूध नहीं निकलता, तो स्तनों में दूध जमा होने, दर्द और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में इससे स्तन में गांठ जैसा महसूस होना या स्तन में सूजन का संक्रमण होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए यदि मां की सेहत अनुमति देती है, तो स्तनपान या दूध निकालने की नियमित प्रक्रिया बनाए रखना उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, हर तरह के बुखार को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। यदि मां को तेज या लगातार बुखार है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, बहुत कमजोरी महसूस हो रही है या संक्रमण के गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। कुछ विशेष बीमारियों, दवाओं या उपचार की परिस्थितियों में स्तनपान को लेकर अलग सलाह की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में डॉक्टर से अपनी स्थिति के अनुसार जानकारी लेना जरूरी है।
स्तनपान कराते समय मां हाथों की सफाई का ध्यान रखें। यदि सर्दी या खांसी है, तो बच्चे के पास खांसने या छींकने से बचें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करें। यदि मां सीधे स्तनपान नहीं करा पा रही है, तो डॉक्टर की सलाह से दूध निकालकर बच्चे को देने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, मां को बुखार होने पर बच्चे को स्तनपान कराना हमेशा बंद करने की जरूरत नहीं होती। मां के दूध में मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन मां की बीमारी का कारण, उसकी गंभीरता और इस्तेमाल की जा रही दवाओं को ध्यान में रखना भी जरूरी है। इसलिए किसी गलतफहमी के आधार पर स्तनपान रोकने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें और मां तथा बच्चे, दोनों की सेहत का ध्यान रखें।

