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इस दिवाली घर पर बनाएं दक्षिण भारत की 3 मशहूर जीआई टैग मिठाइयां, तिरुपति लड्डू से धारवाड़ पेड़ा तक!

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई से लेकर पकवानों और मिठाइयों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस खास मौके पर मेहमानों का स्वागत मिठाई खिलाकर करना भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा है। आमतौर पर दिवाली पर घरों में बेसन के लड्डू, काजू कतली, गुलाब जामुन और बर्फी जैसी मिठाइयां बनाई जाती हैं, लेकिन अगर इस बार आप अपने मेहमानों को कुछ अलग और खास खिलाना चाहते हैं, तो दक्षिण भारत की तीन मशहूर मिठाइयां आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती हैं। इन मिठाइयों की खासियत केवल इनका स्वाद ही नहीं, बल्कि इनका अपनी खास जगह से जुड़ा होना भी है। आंध्र प्रदेश का तिरुपति लड्डू, कर्नाटक का धारवाड़ पेड़ा और तमिलनाडु की श्रीविल्लिपुथुर पालकोवा अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते हैं। इन तीनों मिठाइयों को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी प्राप्त है, जो इनके खास क्षेत्रीय जुड़ाव और पारंपरिक पहचान को दर्शाता है।

दक्षिण भारत की इन मिठाइयों को घर पर बनाने के लिए बहुत अधिक महंगी सामग्री की जरूरत नहीं होती। दूध, चीनी, बेसन, घी, इलायची और कुछ सूखे मेवों जैसी सामान्य चीजों से इनके घरेलू रूप तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि घर पर बनाई गई मिठाइयां पारंपरिक जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की हूबहू नकल नहीं होतीं, क्योंकि उनके निर्माण में क्षेत्र विशेष की पारंपरिक विधियां और निर्धारित विशेषताएं शामिल होती हैं। फिर भी इनकी घरेलू विधियां दिवाली के पकवानों में दक्षिण भारत का स्वाद शामिल करने का अच्छा तरीका हैं।

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर का लड्डू देशभर में प्रसिद्ध है। यह केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद के रूप में विशेष महत्व रखता है। तिरुमला मंदिर में मिलने वाले इस लड्डू का स्वाद, आकार और बनाने की पारंपरिक विधि इसे दूसरी मिठाइयों से अलग पहचान देती है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में प्राप्त करना चाहते हैं। तिरुपति लड्डू को वर्ष 2009 में जीआई टैग मिला था। इसकी पारंपरिक तैयारी मंदिर की निर्धारित व्यवस्था और विधि के अनुसार होती है। घर पर आप बेसन और सूखे मेवों की मदद से इससे मिलता-जुलता लड्डू बना सकते हैं।

इसके लिए एक कप बेसन, आधा कप चीनी, आधा कप पानी, तीन से चार चम्मच घी, थोड़े काजू-किशमिश और आधा चम्मच इलायची पाउडर की जरूरत होगी। सबसे पहले बेसन में थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें। अब एक कड़ाही में घी गर्म करें और बेसन के घोल से छोटी-छोटी बूंदी तैयार कर लें। दूसरी तरफ एक बर्तन में चीनी और पानी डालकर चाशनी बना लें। जब चाशनी तैयार हो जाए, तो उसमें तली हुई बूंदी डालकर अच्छी तरह मिला दें। अब इसमें इलायची पाउडर, कटे हुए काजू और किशमिश डालें। मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें और जब यह हाथ से संभालने लायक हो जाए, तब हथेलियों की सहायता से गोल लड्डू बना लें। दिवाली पर इन्हें मेहमानों को परोसकर त्योहार की मिठास बढ़ाई जा सकती है।

कर्नाटक के धारवाड़ शहर का पेड़ा भी अपनी अलग पहचान रखता है। इसका गहरा भूरा रंग और दूध से आने वाला खास स्वाद इसे सामान्य पेड़ों से अलग बनाता है। धारवाड़ पेड़ा बनाने में मुख्य रूप से दूध और चीनी का इस्तेमाल होता है। इसे वर्ष 2008 में जीआई टैग प्राप्त हुआ था। इसकी पारंपरिक पहचान लंबे समय से धारवाड़ शहर से जुड़ी हुई है। इस मिठाई की खासियत है कि दूध को धीमी आंच पर लगातार पकाकर उसका स्वाद और रंग विकसित किया जाता है। घर पर इसका सरल रूप बनाने के लिए एक लीटर फुल क्रीम दूध, चार से पांच चम्मच चीनी, एक चम्मच घी और थोड़ी इलायची पाउडर लें।

सबसे पहले भारी तले वाली कड़ाही में दूध डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। दूध को लगातार चलाते रहें, ताकि वह बर्तन के तले में चिपके नहीं। धीरे-धीरे दूध गाढ़ा होकर मावे जैसी अवस्था में पहुंचने लगेगा। अब इसमें चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण को लगातार चलाते हुए पकाते रहें, जब तक उसका रंग हल्का भूरा न होने लगे और वह गाढ़ा न हो जाए। आखिर में इलायची पाउडर मिलाएं और गैस बंद कर दें। मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें। इसके बाद हाथों से छोटे-छोटे पेड़ों का आकार तैयार कर लें। इस तरह घर पर दूध से बनी स्वादिष्ट मिठाई तैयार हो जाएगी, जिसे त्योहार के अवसर पर परोसा जा सकता है।

तमिलनाडु के श्रीविल्लिपुथुर क्षेत्र की पालकोवा भी दक्षिण भारत की मशहूर दूध से बनी मिठाइयों में शामिल है। इसका स्वाद मलाईदार होता है और इसे तैयार करने के लिए दूध को काफी देर तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। दूध में मौजूद पानी धीरे-धीरे कम होता जाता है और वह गाढ़ा होकर दानेदार तथा मलाईदार मिठाई का रूप लेने लगता है। श्रीविल्लिपुथुर पालकोवा को वर्ष 2019 में जीआई टैग मिला था। इसकी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत अधिक सामग्री की जरूरत नहीं होती। एक लीटर फुल क्रीम दूध और चार से पांच चम्मच चीनी से इसका घरेलू रूप तैयार किया जा सकता है।

इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक चौड़ी और भारी तले वाली कड़ाही में दूध डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। दूध को बीच-बीच में चलाते रहें और कड़ाही के किनारों पर जमने वाली मलाई को खुरचकर वापस दूध में मिलाते रहें। ऐसा करने से दूध धीरे-धीरे गाढ़ा होता जाएगा और उसका मलाईदार स्वाद बढ़ेगा। जब दूध काफी कम होकर गाढ़ा हो जाए, तब इसमें चीनी डालें। अब मिश्रण को लगातार चलाते हुए पकाएं, ताकि चीनी अच्छी तरह घुल जाए और मिठाई बर्तन में चिपके नहीं। जब मिश्रण हलवे जैसा गाढ़ा दिखाई देने लगे, तब गैस बंद कर दें। इसे थोड़ा ठंडा होने दें और छोटी कटोरियों में निकालकर परोसें। चाहें तो इसे ठंडा करके भी खा सकते हैं।

इस दिवाली अगर आप मेहमानों के सामने कुछ नया परोसना चाहते हैं, तो दक्षिण भारत की ये तीनों मिठाइयां आपके त्योहार को खास बना सकती हैं। तिरुपति लड्डू का पारंपरिक स्वाद, धारवाड़ पेड़े की गहरी मिठास और श्रीविल्लिपुथुर पालकोवा की मलाईदार बनावट मिठाई की थाली में अलग-अलग स्वाद जोड़ती है। इनकी घरेलू विधियां भी बहुत कठिन नहीं हैं, बस दूध को पकाने और मिश्रण को सही गाढ़ापन देने में थोड़ा धैर्य रखना होगा। इस बार बाजार से मिठाइयां लाने के साथ-साथ घर पर इन क्षेत्रीय स्वादों को आजमाइए और दिवाली के अवसर पर अपने परिवार तथा मेहमानों के साथ दक्षिण भारत की मिठास का आनंद लीजिए।

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