Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब सड़क-पुल से लेकर बड़े प्रोजेक्ट्स की होगी थर्ड पार्टी जांच

उत्तर प्रदेश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने अहम फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट यानी TPQA कराई जाएगी। इसका मकसद बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स में निर्माण की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और किसी भी तरह की लापरवाही पर नजर रखना है।

सरकार के इस फैसले के दायरे में सिर्फ सड़कें ही नहीं, बल्कि पुल, सीवर, जलापूर्ति और सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं भी आएंगी। यानी जिन प्रोजेक्ट्स पर सरकार 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है, उनकी गुणवत्ता की जांच स्वतंत्र तकनीकी संस्थानों के जरिए कराई जाएगी।

इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों को दी गई है। वित्त विभाग की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक प्रदेश के अलग-अलग मंडलों में बड़े प्रोजेक्ट्स की जांच के लिए IIT कानपुर, IIT BHU वाराणसी और IIT रुड़की को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट का मतलब है कि जिस विभाग या एजेंसी की निगरानी में कोई प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है, उसके अलावा एक स्वतंत्र तकनीकी संस्था उसकी गुणवत्ता की जांच करेगी। इससे निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, काम की तकनीकी गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के पालन की जांच की जा सकेगी।

सरकार के इस कदम को बड़े निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर सड़क और पुल जैसी परियोजनाओं में गुणवत्ता का सीधा संबंध आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा से होता है। ऐसे में स्वतंत्र तकनीकी संस्थानों से जांच कराने का फैसला काफी अहम हो सकता है।

वित्त विभाग के शासनादेश में प्रदेश के अलग-अलग मंडलों के लिए IITs की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। अब संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों को बड़े प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता के मानकों का विशेष ध्यान रखना होगा।

इस व्यवस्था से उन परियोजनाओं पर भी नजर रखी जा सकेगी जिनमें सरकार बड़ी राशि खर्च कर रही है। अगर जांच के दौरान किसी प्रोजेक्ट में तकनीकी खामी या निर्धारित मानकों से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में सड़क, पुल, जलापूर्ति और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। अब इन परियोजनाओं की गुणवत्ता की जांच सिर्फ विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की विशेषज्ञता का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

कुल मिलाकर, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली परियोजनाओं के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट लागू होने से निर्माण कार्यों की निगरानी का दायरा बढ़ेगा। अब देखना होगा कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और निगरानी में कितना सुधार देखने को मिलता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles