पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी POJK को लेकर ब्रिटेन में हलचल तेज हो गई है। 70 से ज्यादा ब्रिटिश सांसदों ने इलाके की स्थिति को लेकर चिंता जताई है और संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है। सांसदों ने नागरिकों की सुरक्षा, मानवाधिकार और वहां की मौजूदा परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ब्रिटिश सांसदों की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब POJK में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इलाके में लोगों की मांगों और प्रशासन की कार्रवाई के बीच तनाव की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता संचार व्यवस्था को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर पाबंदियों के कारण लोगों का अपने परिवारों से संपर्क प्रभावित हुआ। ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी परिवारों के लिए यह स्थिति और ज्यादा चिंता पैदा करने वाली है, क्योंकि उनके रिश्तेदार POJK में रहते हैं।
ब्रिटिश सांसदों ने मांग की है कि इलाके में संचार सेवाओं को बहाल किया जाए और लोगों को अपने परिवारों से संपर्क करने की सुविधा मिले। इसके साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के अधिकारों का सम्मान करने और गिरफ्तार किए गए लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित अधिकार देने की अपील भी की गई है।
इस पूरे मामले में मानवाधिकारों का मुद्दा भी केंद्र में आ गया है। सांसदों का कहना है कि तनावपूर्ण परिस्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने स्वतंत्र पर्यवेक्षकों और मानवाधिकार संगठनों की पहुंच को लेकर भी चिंता जताई है।
POJK में विरोध प्रदर्शन की वजहों को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक समस्याओं, महंगाई, बिजली, संसाधनों और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। वहीं पाकिस्तान प्रशासन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात करता रहा है।
ऐसे में 70 से ज्यादा ब्रिटिश सांसदों का एक साथ इस मुद्दे पर आवाज उठाना पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सांसदों की ओर से की गई मांग को ब्रिटेन सरकार की ओर से किसी सैन्य कार्रवाई या आधिकारिक नीति में बदलाव का ऐलान नहीं माना जा सकता।
अब नजर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया पर है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान प्रशासन पर POJK की स्थिति को लेकर जवाब देने का दबाव बढ़ सकता है।
भारत के नजरिए से भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का मुद्दा लंबे समय से भारत-पाकिस्तान संबंधों का संवेदनशील हिस्सा रहा है। ऐसे में ब्रिटेन की संसद में POJK की स्थिति को लेकर उठी आवाज इस विवाद को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला सकती है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि क्या ब्रिटिश सांसदों की यह पहल संयुक्त राष्ट्र तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में पाकिस्तान पर और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा। POJK में हालात किस दिशा में जाते हैं और पाकिस्तान सरकार इस दबाव का क्या जवाब देती है, इस पर अब सबकी नजर रहेगी।


