Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

Shaurya Path: Kirana Hills और Skardu पर बड़ा खुलासा! Pakistan बात करना चाहता था, फिर India ने लिया बड़ा फैसला

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के एक बयान ने भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव से जुड़े कई अहम पहलुओं को फिर चर्चा में ला दिया है। उनके मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान भारतीय सैन्य नेतृत्व की नजर पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर थी। सरगोधा से लेकर स्कार्दू तक कई संभावित लक्ष्यों को लेकर रणनीतिक स्तर पर विचार किया गया था। इस खुलासे से यह संकेत मिलता है कि भारत की सैन्य योजना सिर्फ कुछ सीमित ठिकानों तक नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार कई विकल्प तैयार रखे गए थे।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य और आतंकवादी ढांचे को लेकर भारत ने जिस तरह की कार्रवाई की, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी ध्यान खींचा था। भारतीय सैन्य अभियान में सटीक हमलों के साथ-साथ परिस्थितियों के हिसाब से लक्ष्य बदलने की क्षमता दिखाई दी। पूर्व CDS अनिल चौहान ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान इसी अभियान से जुड़े घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तान की तरफ से बातचीत की इच्छा जताए जाने के बाद भी भारतीय सैन्य नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय था।

जनरल अनिल चौहान के मुताबिक, करीब सुबह 10 बजे पाकिस्तान की ओर से बातचीत की इच्छा जताए जाने की जानकारी सामने आई। इसी दौरान वायुसेना प्रमुख ने सरगोधा पर कार्रवाई की अनुमति मांगी और उन्हें आगे बढ़ने की मंजूरी दी गई। इस घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि बातचीत की संभावना सामने आने के बावजूद भारत अपनी सैन्य तैयारियों को लेकर किसी तरह की जल्दबाजी में पीछे हटने के बजाय परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए था।

इसके बाद भारतीय सैन्य नेतृत्व ने दो और संभावित लक्ष्यों की पहचान करने को कहा। इनमें एक महत्वपूर्ण नाम स्कार्दू एयरबेस का था, जो गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित है। स्कार्दू को लेकर भी भारतीय सैन्य योजना में विकल्प तैयार किया गया था। हालांकि वहां खराब मौसम के कारण अभियान की योजना को आगे बढ़ाना मुश्किल हुआ। इसके बाद वैकल्पिक लक्ष्य के रूप में भोलारी को चुना गया।

यह पूरा घटनाक्रम भारतीय सैन्य रणनीति के एक महत्वपूर्ण पहलू को सामने लाता है। किसी भी सैन्य अभियान में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। मौसम, तकनीकी परिस्थितियां, खुफिया जानकारी और दुश्मन की गतिविधियां अचानक किसी भी योजना को बदल सकती हैं। ऐसे में एक से ज्यादा विकल्प तैयार रखना और जरूरत पड़ने पर लक्ष्य बदलना सैन्य योजना का अहम हिस्सा माना जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला।

अब बात करते हैं उस जगह की, जिसका नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगातार चर्चा में रहा था—किराना हिल्स। पाकिस्तान के सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित किराना हिल्स लंबे समय से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े दावों के कारण संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है। ऑपरेशन के दौरान जब पाकिस्तानी मीडिया में किराना हिल्स से धुआं उठने की तस्वीरें सामने आईं, तो सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के दावे किए जाने लगे।

सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया कि क्या भारत ने पाकिस्तान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था। हालांकि किसी भी सैन्य कार्रवाई से जुड़े ऐसे संवेदनशील दावों को लेकर आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी को अलग-अलग देखना जरूरी है। किसी इलाके में धुआं दिखाई देना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वहां मौजूद किसी विशेष परमाणु सुविधा को निशाना बनाया गया था।

किराना हिल्स का नाम सामने आने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव को लेकर चर्चाएं और तेज हुई थीं। पाकिस्तान के लिए सरगोधा और उसके आसपास का क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं भारत के लिए किसी भी ऐसे सैन्य या रणनीतिक ढांचे की निगरानी महत्वपूर्ण हो सकती है, जिसे संभावित सुरक्षा खतरे से जोड़ा जाता हो।

अनिल चौहान के बयान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य सोच में मौजूद वैकल्पिक योजनाओं की तस्वीर सामने आती है। सरगोधा, स्कार्दू और फिर भोलारी जैसे संभावित लक्ष्यों का जिक्र यह बताता है कि अभियान के दौरान परिस्थितियों के अनुसार विकल्प तैयार रखे गए थे। खराब मौसम ने एक योजना को प्रभावित किया, लेकिन इसके बाद वैकल्पिक लक्ष्य पर ध्यान दिया गया।

अब इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान की बातचीत की इच्छा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। पाकिस्तान की तरफ से बातचीत का संकेत मिलने के बावजूद भारत ने सैन्य विकल्पों को सक्रिय रखा। इसका संदेश यही था कि किसी भी बातचीत की प्रक्रिया से पहले जमीन पर सुरक्षा स्थिति और सैन्य तैयारियों को कमजोर नहीं किया जाएगा।

कुल मिलाकर पूर्व CDS अनिल चौहान के खुलासे ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की रणनीतिक तैयारी को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है। हालांकि किराना हिल्स से जुड़े कई दावे आज भी चर्चा का विषय हैं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य क्षमता, त्वरित निर्णय लेने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने की क्षमता को दुनिया के सामने रखा। अब इन खुलासों के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज है कि उस अभियान के दौरान भारत की वास्तविक रणनीति कितनी व्यापक थी और किन-किन संभावित लक्ष्यों को लेकर पहले से तैयारी की गई थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles