सोने की कीमतों में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका भाव तीन सप्ताह से ज्यादा समय के निचले स्तर तक पहुंच गया। एक तरफ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेला है, तो दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। इन दोनों परिस्थितियों ने सोने की कीमतों और निवेशकों की धारणा पर दबाव बढ़ा दिया है।
मौजूद जानकारी के मुताबिक, बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना करीब 4,330.79 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान इसकी कीमत लगभग 4,330 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जो 7 अगस्त के बाद का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है। वहीं अमेरिकी सोने के वायदा भाव में भी करीब 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और दिसंबर डिलीवरी वाला सौदा 4,377.90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।
आमतौर पर जब दुनिया में आर्थिक या भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता है। लेकिन इस बार पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर सोने के लिए कुछ अलग दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य टकराव के बाद कच्चे तेल की कीमत करीब एक महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। तेल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की चिंता और मजबूत हुई है।
महंगाई की आशंका बढ़ते ही निवेशकों का रुख अमेरिकी डॉलर की तरफ हुआ। डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसका सीधा असर सोने पर पड़ा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है और इससे उसकी मांग पर दबाव पड़ सकता है।
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतें अगर लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो महंगाई का जोखिम भी बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों को ऊंचा रखने या जरूरत पड़ने पर बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है। ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों का असर सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्ति पर पड़ता है।
दरअसल, सोना निवेशकों को नियमित ब्याज या आय नहीं देता। इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना मजबूत होती है, तो निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े हर संकेत पर सोने के बाजार की नजर रहती है।
अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले रोजगार और आर्थिक आंकड़ों पर भी है। निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों और गैर-कृषि रोजगार के आंकड़ों से यह संकेत मिल सकता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है और फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपना सकता है। अगर आंकड़े मजबूत आते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ती है, तो डॉलर को और मजबूती मिल सकती है।
दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो चांदी करीब 0.1 प्रतिशत बढ़कर 64.35 डॉलर प्रति औंस रही। वहीं प्लैटिनम 0.4 प्रतिशत गिरकर 1,734.06 डॉलर और पैलेडियम 0.6 प्रतिशत बढ़कर 1,319.12 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा।
फिलहाल सोने के बाजार में तीन बड़े फैक्टर सबसे अहम बने हुए हैं—अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख और पश्चिम एशिया में जारी तनाव। अगर तेल की कीमतें और महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है। वहीं भू-राजनीतिक तनाव में अचानक बढ़ोतरी या अमेरिकी मौद्रिक नीति में नरमी का संकेत सोने की कीमतों को फिर से सहारा दे सकता है।


