महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों अपनी सख्त कार्रवाई को लेकर लगातार चर्चा में हैं। खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर निरीक्षण और कार्रवाई के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया पर लोग उनके सख्त रवैये की तारीफ कर रहे हैं और उन्हें लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि तुकाराम मुंढे का कहना है कि लोकप्रियता उनके लिए कोई लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनका सबसे बड़ा उद्देश्य जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।
तुकाराम मुंढे ने कहा कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता उनके काम से ध्यान भटकाने वाली चीज नहीं है। उनके मुताबिक, लोकप्रियता कभी उनका लक्ष्य नहीं रही। उनके लिए जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरा अभियान किसी एक व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि भारत और जनस्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लक्ष्य से जुड़ा है।
मुंढे के मुताबिक खाद्य और दवा का क्षेत्र सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। अगर उनके काम और भूमिका के कारण खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य जैसे मुद्दे आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन रहे हैं, तो यह उनके लिए खुशी की बात है। उनका मानना है कि नागरिकों को भी जनस्वास्थ्य को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल करना चाहिए।
मई 2026 में महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर का पद संभालने के बाद से अब तक 12,083 संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी मुंढे ने दी है। इनमें सुधार नोटिस जारी करने से लेकर लाइसेंस निलंबित करने और अन्य कानूनी कार्रवाई तक शामिल हैं। उनके अनुसार 5,269 संस्थानों को सुधार नोटिस दिए गए हैं, जबकि 603 संस्थानों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन के आदेश जारी किए गए हैं।
खाद्य प्रतिष्ठानों पर भी FDA की निगरानी तेज की गई है। मुंढे के मुताबिक होटल, रेस्तरां और खाने-पीने से जुड़े प्रतिष्ठानों के 1,803 निरीक्षण किए गए। इनमें 948 मामलों में सुधार नोटिस जारी किए गए, जबकि 199 लाइसेंस निलंबित किए गए। उनका कहना है कि रेस्तरां में खाद्य सुरक्षा से जुड़े आम उल्लंघनों में स्वच्छता और निर्माण संबंधी नियमों का पालन न करना, खराब गुणवत्ता वाले कच्चे माल का इस्तेमाल और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी शामिल हैं।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म को लेकर भी मुंढे ने अपना रुख साफ किया है। उनका कहना है कि कानून के तहत स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियां भी फूड बिजनेस ऑपरेटर की श्रेणी में आती हैं। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के अपने गोदाम भी हैं और FDA की ओर से उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। यानी ऑनलाइन ऑर्डर होने के बावजूद खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी से कोई कंपनी बच नहीं सकती।
दवाओं से जुड़े मामलों में भी FDA की कार्रवाई जारी है। मुंढे के मुताबिक उनके कार्यकाल में विभिन्न नियमों के उल्लंघन के कारण 740 फार्मेसियों के लाइसेंस रद्द या निलंबित किए गए हैं। उन्होंने यह भी माना कि महाराष्ट्र में घटिया और नकली दवाओं की समस्या मौजूद है, हालांकि इसकी सही संख्या तय करना मुश्किल है। उन्होंने अधिकारियों को केवल औपचारिक निरीक्षण करने के बजाय दवा निर्माण और वितरण की पूरी प्रक्रिया पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
ऑनलाइन फार्मेसी और दवा डिलीवरी प्लेटफॉर्म को लेकर भी उन्होंने कहा कि इन पर निगरानी की जाती है। ऑनलाइन दवा बिक्री फिलहाल प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन ऐसी कंपनियों को संबंधित कानून और नियमों का पालन करना जरूरी है। FDA की कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।
तुकाराम मुंढे की कार्रवाई को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रियता भी मिली है। कई लोग उनके सख्त रवैये की तुलना फिल्मों के ईमानदार और सख्त अधिकारियों से कर रहे हैं। लेकिन मुंढे का कहना है कि वह अपनी लोकप्रियता पर ध्यान देने के बजाय उस काम पर ध्यान देना चाहते हैं, जिसकी जिम्मेदारी उन्हें सरकार ने दी है। उनका कहना है कि अगर उनके काम की वजह से जनस्वास्थ्य एक बड़ा सार्वजनिक मुद्दा बनता है, तो यही सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
हालांकि FDA की कुछ कार्रवाइयों को लेकर कानूनी सवाल भी उठे हैं। सिप्ला मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में मुंढे ने कहा कि इसे बड़ी प्रक्रियात्मक गलती नहीं कहा जा सकता और संबंधित मामले में दोबारा नोटिस जारी किया गया है। उनका कहना है कि FDA कानून के मुताबिक काम कर रहा है और किसी भी प्रक्रियात्मक गलती को गंभीरता से लिया जाता है।
मुंढे ने यह भी बताया कि FDA की जांच व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य में चार नई प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। उनका मानना है कि खाद्य और दवा सुरक्षा को केवल सरकारी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए आम लोगों को भी जागरूक होना होगा।
कुल मिलाकर तुकाराम मुंढे की सख्त कार्रवाई ने महाराष्ट्र में खाद्य और दवा सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। जहां एक तरफ उनके एक्शन की तारीफ हो रही है, वहीं दूसरी तरफ हर कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की जरूरत भी सामने आई है। लेकिन मुंढे का संदेश साफ है कि उनके लिए लोकप्रियता नहीं, बल्कि जनता का स्वास्थ्य सबसे पहली प्राथमिकता है।


