अरुणाचल प्रदेश की बर्फीली चोटियों के बीच भारत और चीन के बीच सीमा पर एक अहम बैठक हुई है। इस बैठक को दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर संवाद बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में दो नई हॉटलाइन शुरू करने का फैसला लिया गया है, जिससे सीमा पर तैनात भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA के बीच सीधे संपर्क का रास्ता और मजबूत होगा।
यह बैठक कोर कमांडर स्तर के अधिकारियों के बीच हुई। भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े तनाव को कम करने और सैन्य स्तर पर संवाद बनाए रखने के लिए पहले भी इस तरह की बैठकें होती रही हैं। हालांकि, इस बार बैठक की जगह ने इसे खास बना दिया है। इससे पहले दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर की ज्यादातर बैठकें लद्दाख के चुशूल और मोल्डो जैसे स्थानों पर होती थीं, लेकिन इस बार बातचीत अरुणाचल प्रदेश के सेक्टर में हुई है।
बताया जा रहा है कि यह पहली बार है जब इस स्तर की सैन्य वार्ता अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर हुई है। यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है और पिछले कुछ समय में भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर यहां से भी खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में इसी क्षेत्र में उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता होना अपने आप में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में दोनों पक्षों के अधिकारियों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। दोनों सेनाओं के बीच संवाद को बेहतर बनाने के लिए नई हॉटलाइन शुरू करने का फैसला भी इसी बातचीत का अहम हिस्सा रहा। हॉटलाइन का मकसद किसी भी आपात स्थिति या सीमा पर अचानक पैदा होने वाले तनाव के दौरान दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारियों के बीच तत्काल संपर्क स्थापित करना है।
सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच कई बार छोटी घटनाएं भी बड़े तनाव का कारण बन सकती हैं। ऐसे में सीधा और तेज संवाद बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। नई हॉटलाइन से दोनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों को किसी भी गलतफहमी को तुरंत दूर करने और स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने में मदद मिल सकती है।
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत होती रही है। कई दौर की बातचीत के जरिए सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों की स्थिति को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की गई। अब अरुणाचल प्रदेश में कोर कमांडर स्तर की बैठक और दो नई हॉटलाइन का फैसला इस संवाद प्रक्रिया को एक नए क्षेत्र तक ले जाता दिखाई दे रहा है।
इस बैठक का समय भी काफी महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच यह सैन्य संपर्क सामने आया है। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना को लेकर भी चर्चा है। ऐसे में दोनों देशों की सेनाओं के बीच बातचीत को द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करता रहा है, जबकि भारत स्पष्ट रूप से अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। सीमा से जुड़े इन मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर संवाद जारी रखना इसलिए जरूरी है ताकि किसी भी स्थानीय घटना को बड़े टकराव में बदलने से रोका जा सके।
दो नई हॉटलाइन शुरू करने का फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल बातचीत की सुविधा बढ़ाना नहीं, बल्कि सीमा पर किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में तत्काल संपर्क स्थापित करना भी है। इससे दोनों सेनाओं के बीच भरोसा कायम करने और तनाव को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल अरुणाचल प्रदेश में हुई यह बैठक भारत-चीन सीमा प्रबंधन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। पहली बार इस क्षेत्र में कोर कमांडर स्तर की वार्ता और दो नई हॉटलाइन पर सहमति यह संकेत देती है कि दोनों देश सीमा पर संवाद के तंत्र को और मजबूत करना चाहते हैं। हालांकि, वास्तविक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले समय में दोनों पक्ष इन फैसलों को किस तरह लागू करते हैं और सीमा पर जमीनी स्थिति कितनी स्थिर रहती है।


