पश्चिम एशिया में तनाव के बीच एक तरफ सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के हमलों का सामना कर रहा है, तो दूसरी तरफ भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। सऊदी अरब पर हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के हालात और भारत-यूएई संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। आखिर इस बातचीत में क्या मुद्दे उठे और सऊदी अरब के लिए मौजूदा हालात कितने अहम हैं? आइए जानते हैं पूरी खबर।
सबसे पहले बात सऊदी अरब की। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हाल के दिनों में सऊदी अरब ने हूती हमलों और ड्रोन गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, देश की ओर आने वाले कुछ ड्रोन को रोकने की कार्रवाई भी की गई है। इन घटनाओं के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था और तेल आपूर्ति पर संभावित असर को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
इस संघर्ष का असर केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं है। लाल सागर और आसपास के समुद्री रास्ते अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव तेल की आवाजाही और वैश्विक बाजारों पर भी असर डाल सकता है। हालिया हमलों के बीच सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन और ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। हालांकि, हर हमले की जिम्मेदारी और उसके वास्तविक प्रभाव को लेकर अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
इसी क्षेत्रीय तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान के बीच फोन पर बातचीत हुई। 18 सितंबर को हुई इस बातचीत में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
बातचीत का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारत और UAE के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना रहा। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, निवेश और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। भारत और UAE के संबंधों में इन क्षेत्रों का विशेष महत्व है, क्योंकि दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और UAE राष्ट्रपति ने क्षेत्रीय हालात पर अपने विचार साझा किए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी नए सैन्य समझौते, संयुक्त सैन्य कार्रवाई या सऊदी अरब को लेकर किसी विशेष फैसले की घोषणा का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस फोन कॉल को सीधे तौर पर सऊदी अरब की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताना सही नहीं होगा। आधिकारिक जानकारी में मुख्य रूप से क्षेत्रीय शांति और द्विपक्षीय सहयोग पर जोर दिया गया है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर ऊर्जा बाजारों और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है, इसलिए वहां की ऊर्जा सुविधाओं और परिवहन मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनी हुई है। क्षेत्रीय तनाव के बीच विभिन्न देशों की कूटनीतिक बातचीत भी इसी व्यापक सुरक्षा और स्थिरता के संदर्भ में देखी जा रही है।
कुल मिलाकर, एक ओर सऊदी अरब हूती हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत और UAE ने बातचीत के जरिए पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए आगे कौन-से कूटनीतिक कदम उठाए जाते हैं और भारत-UAE साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग किस तरह आगे बढ़ता है।


