कार खरीदने की सोच रहे हैं और पेट्रोल के बढ़ते खर्च से परेशान हैं? तो मारुति सुजुकी की ओर से आई यह खबर आपके लिए अहम हो सकती है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में 10 लाख हरित वाहन बेचने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य में सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। लेकिन सवाल है—आखिर कंपनी को इस बड़े लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद क्यों है? और स्विफ्ट, डिजायर तथा बलेनो के नए ऑटोमैटिक सीएनजी विकल्प इसमें क्या भूमिका निभा सकते हैं?
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने अपने ‘ऑटो ग्रीन मिशन’ के तहत हरित वाहनों की बिक्री बढ़ाने की योजना बनाई है। कंपनी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी, विपणन एवं बिक्री, पार्थो बनर्जी के मुताबिक, पहले चालू वित्त वर्ष में आठ से नौ लाख हरित वाहन बेचने की उम्मीद थी। लेकिन नए ऑटोमैटिक एस-सीएनजी मॉडल पेश किए जाने के बाद बिक्री का अनुमान बढ़ाकर करीब 10 लाख इकाई कर दिया गया है।
कंपनी ने शुक्रवार को अपने लोकप्रिय मॉडल स्विफ्ट, डिजायर और बलेनो के ऑटोमैटिक एस-सीएनजी संस्करण पेश किए। इन विकल्पों के जरिए कंपनी उन ग्राहकों तक पहुंचने की उम्मीद कर रही है, जो सीएनजी के कम परिचालन खर्च का लाभ तो चाहते हैं, लेकिन मैनुअल गियर बदलने की सुविधा से समझौता नहीं करना चाहते।
अब तक सीएनजी कारों के सामने एक चुनौती यह थी कि कई ग्राहक ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की सुविधा चाहते थे। पेट्रोल ऑटोमैटिक कारों के मुकाबले सीएनजी विकल्पों में यह सुविधा सीमित थी। कंपनी का मानना है कि नए मॉडल ऐसे ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं, जो रोजाना की ड्राइविंग में सुविधा और खर्च—दोनों को ध्यान में रखते हैं।
पार्थो बनर्जी के अनुसार, नए ऑटोमैटिक सीएनजी मॉडल सीएनजी बाजार को ऐसे ग्राहक वर्ग तक ले जा सकते हैं, जिसे पहले पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया था। हालांकि, इन मॉडलों की वास्तविक मांग और बिक्री का असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
मारुति सुजुकी की सीएनजी श्रेणी में मजबूत मौजूदगी भी इस लक्ष्य का एक अहम हिस्सा है। कंपनी के मुताबिक, सीएनजी बाजार में उसकी हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है और वह फिलहाल हर महीने लगभग 80 हजार सीएनजी वाहन बेच रही है। कंपनी को उम्मीद है कि इस आधार और नए विकल्पों के सहारे वह अपने बिक्री लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।
कच्चे तेल की कीमतों का मुद्दा भी इस रणनीति से जुड़ा है। जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर ग्राहकों की चिंता बढ़ती है, तो कम परिचालन खर्च वाले विकल्पों में दिलचस्पी बढ़ सकती है। बनर्जी ने भी कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हरित वाहनों को अपनाने को बढ़ावा दे सकती हैं। हालांकि, वाहन चुनते समय ईंधन की कीमत के साथ-साथ शुरुआती खरीद मूल्य, रखरखाव, इस्तेमाल और उपलब्ध सुविधाओं को भी देखना जरूरी है।
यहां एक बात समझना भी जरूरी है कि हरित वाहन एक ही तरह के नहीं होते। सीएनजी वाहन गैस से चलते हैं, हाइब्रिड वाहनों में इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का संयोजन हो सकता है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी से चलते हैं। इनकी लागत, उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 10 लाख हरित वाहन बेचने का लक्ष्य रखा है। स्विफ्ट, डिजायर और बलेनो के ऑटोमैटिक एस-सीएनजी विकल्प कंपनी की रणनीति का नया हिस्सा हैं। अब देखना होगा कि ग्राहकों की मांग और बाजार की परिस्थितियां कंपनी को इस लक्ष्य के कितना करीब ले जाती हैं।


