अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईंधन की बढ़ती कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट को लेकर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों के उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें मौजूदा ऊर्जा संकट के लिए ईरान को जिम्मेदार बताया जा रहा है। बकाई ने दावा किया कि मौजूदा संकट के पीछे अमेरिका की कार्रवाई और उससे पैदा हुई परिस्थितियों की भी भूमिका है।
बकाई ने सामाजिक माध्यम पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिकी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार संकट की शुरुआत और उसके बाद पैदा हुई परिस्थितियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों की याददाश्त इतनी कमजोर नहीं है कि वे यह भूल जाएं कि उनके अनुसार आक्रामक युद्ध किसने शुरू किया और किन कदमों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट पैदा हुआ तथा व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई।
ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिकी रवैये की तुलना इतिहास में युद्ध की घटनाओं को अपनी सुविधा के अनुसार पेश करने की रणनीति से की। उन्होंने 1939 में पोलैंड पर नाजी जर्मनी के हमले का उदाहरण देते हुए अमेरिकी दावों पर सवाल उठाया। हालांकि यह तुलना ईरानी पक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि बकाई के बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद के केंद्र में है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और यहां जहाजों की आवाजाही में किसी भी बड़े व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय तेल और ईंधन बाजारों पर पड़ सकता है। हाल के घटनाक्रमों के बीच इस मार्ग से तेल और अन्य सामान की आवाजाही में बदलाव देखने को मिला है। बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते और आगे की कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। वहीं, ईरान की ओर से भी लगातार यह कहा जा रहा है कि मौजूदा संकट के लिए केवल तेहरान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। दोनों पक्षों के बयानों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत की संभावनाओं पर भी नजर बनी हुई है।
बकाई ने अमेरिकी प्रशासन की एक अन्य कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई है। ईरानी पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी मीडिया टीम को वीजा नहीं दिए जाने को लेकर अमेरिकी प्रशासन की आलोचना की है। तेहरान का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के उच्चस्तरीय सत्र में भाग लेने और अपनी स्थिति दुनिया के सामने रखने के लिए मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण है।
वर्तमान संकट का असर केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का सीधा संबंध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और तेल बाजार से है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है, इसलिए यहां किसी भी लंबे व्यवधान की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच जारी बयानबाजी पर दुनिया भर की नजर बनी हुई है।
अब सवाल यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप किस दिशा में जाता है और क्या संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद आगे बढ़ता है। एक तरफ अमेरिका ईरान पर क्षेत्रीय संकट और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान का आरोप लगा रहा है, वहीं तेहरान इसके लिए अमेरिकी कार्रवाई को जिम्मेदार बता रहा है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, तेल आपूर्ति और दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहेंगे।


