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LoC से लेकर लाइब्रेरियों तक एक्शन, जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ कई मोर्चों पर कसा शिकंजा

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा और प्रशासनिक मोर्चे पर एक साथ कई स्तरों पर कार्रवाई सामने आई है। पुंछ में नियंत्रण रेखा के पास सेना ने बारूदी सुरंगों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया, वहीं उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने लद्दाख का दौरा कर सुरक्षा स्थिति और सैनिकों की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की। इसके अलावा बारामूला में आतंकवाद से जुड़े एक मामले में एक आवासीय संपत्ति को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत कुर्क किया गया है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों की लाइब्रेरियों में मौजूद पुस्तकों और प्रकाशनों की जांच के बाद बड़ी संख्या में ऐसी किताबों को प्रचलन से हटाया गया है, जिन्हें अधिकारियों ने आपत्तिजनक या प्रतिबंधित सामग्री से जुड़ा पाया।

पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा से सटे अग्रिम इलाकों में सेना की सतर्कता के दौरान संभावित खतरे का पता चला। मेंढर क्षेत्र के फागवाड़ा गली में गश्त कर रहे सैनिकों को दो जंग लगी बारूदी सुरंगें दिखाई दीं। सुरंगों का पता लगते ही इलाके को सुरक्षित किया गया और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद दोनों बारूदी सुरंगों को नियंत्रित तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया।

इसी दौरान हवेली तहसील के कस्बा गांव में भी सेना की गश्ती टुकड़ी को एक व्यक्ति-विरोधी बारूदी सुरंग मिली। सुरक्षाबलों ने इसे भी सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया। इन घटनाओं के बाद इलाके में तलाशी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। नियंत्रण रेखा के आसपास पुराने विस्फोटक और बारूदी सुरंगें सुरक्षाबलों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं, क्योंकि इनके कारण सैनिकों और स्थानीय नागरिकों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने लद्दाख का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सीमावर्ती इलाकों की परिस्थितियों और सैनिकों की परिचालन तैयारियों का जायजा लिया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक में सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया गया।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई भी जारी है। बारामूला में आतंकवाद से जुड़े एक मामले में एक आवासीय संपत्ति को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत कुर्क किया गया है। इस तरह की कार्रवाई में जांच एजेंसियां आतंकवाद से जुड़े मामलों में संदिग्ध संपत्तियों और उनके इस्तेमाल की जांच करती हैं। संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है।

इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों में उपलब्ध पुस्तकों और अन्य प्रकाशनों की भी जांच की गई। प्रशासन के अनुसार, करीब 22 लाख पुस्तकों और प्रकाशनों की समीक्षा की गई। इस प्रक्रिया के दौरान 4,700 से अधिक ऐसी पुस्तकों को प्रचलन से हटाया गया, जिन्हें अधिकारियों ने आपत्तिजनक या प्रतिबंधित सामग्री से जुड़ा माना।

पुस्तकों की जांच का मुद्दा सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा और प्रशासन से भी जुड़ा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षण संस्थानों की लाइब्रेरियों में उपलब्ध सामग्री की समीक्षा इसलिए की गई ताकि प्रतिबंधित या आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार रोका जा सके। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई में यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी पुस्तक को हटाने का आधार स्पष्ट कानूनी और प्रशासनिक मानकों पर निर्धारित हो।

जम्मू-कश्मीर में हालिया घटनाक्रम से साफ है कि सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद से जुड़े मामलों में संपत्ति संबंधी कार्रवाई और प्रशासनिक स्तर पर जांच को भी आगे बढ़ा रही हैं। पुंछ में बारूदी सुरंगों की बरामदगी, लद्दाख में सैन्य तैयारियों की समीक्षा, बारामूला में संपत्ति कुर्की और कॉलेजों की पुस्तकों की जांच—ये सभी अलग-अलग कार्रवाई हैं, लेकिन इनका संबंध क्षेत्र की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

फिलहाल सुरक्षाबलों की निगरानी नियंत्रण रेखा और संवेदनशील इलाकों में जारी है। वहीं आतंकवाद से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई और शिक्षण संस्थानों में सामग्री की समीक्षा की प्रक्रिया भी प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इन कार्रवाइयों से जुड़े अन्य विवरण सामने आ सकते हैं।

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