वायरल संक्रमण या फ्लू ठीक होने के बाद भी कई लोगों में खांसी की समस्या कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती है। खासकर फ्लू या फेफड़ों से जुड़े संक्रमण के बाद श्वसन तंत्र को पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। ऐसे में केवल खांसी बने रहने का मतलब यह नहीं है कि शरीर में बैक्टीरियल संक्रमण है और एंटीबायोटिक की जरूरत है। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
वायरल संक्रमण के बाद बची हुई खांसी को पोस्ट-वायरल कफ कहा जाता है। इस दौरान धूल-मिट्टी, ठंडी हवा, तेज गंध, धुआं और लंबे समय तक बातचीत करने जैसी चीजें भी खांसी को बढ़ा सकती हैं। शरीर को पर्याप्त आराम देना रिकवरी के लिए जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहें और धूम्रपान या धुएं के संपर्क से बचें। कमरे की हवा बहुत शुष्क होने पर उचित ह्यूमिडिटी बनाए रखना भी कुछ लोगों को राहत दे सकता है।
इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात खांसी के पैटर्न पर नजर रखना है। अगर खांसी धीरे-धीरे कम हो रही है और अन्य लक्षण भी बेहतर हो रहे हैं, तो यह सामान्य रिकवरी का हिस्सा हो सकता है। लेकिन अगर समय बीतने के साथ खांसी बढ़ रही है, कफ लगातार ज्यादा हो रहा है या नए लक्षण सामने आ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, तेज या दोबारा बढ़ता बुखार, खून आना, अत्यधिक कमजोरी या सांस से जुड़ी कोई गंभीर समस्या दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। खासकर पहले से फेफड़ों या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को लंबे समय तक बनी खांसी में डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
वायरल संक्रमण के बाद खांसी का इलाज उसके कारण और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए केवल खांसी लंबे समय तक रहने के आधार पर एंटीबायोटिक शुरू करना उचित नहीं है। आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ, धुएं और अन्य ट्रिगर से बचाव तथा लक्षणों पर नजर रखना रिकवरी के दौरान महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। यदि खांसी में सुधार नहीं हो रहा है या स्थिति बिगड़ रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना सबसे जरूरी है।

