मदद के लिए चीखते रहे, लेकिन कुछ ही पलों में जिंदगी की जंग हार गए! उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जहां करीब चार क्विंटल वजनी लोहे का गेट एक सिक्योरिटी गार्ड के ऊपर गिर गया। इस दर्दनाक घटना में 50 वर्षीय गार्ड विक्रम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, मृतक के परिजनों ने गेट खराब होने की जानकारी पहले से होने और हादसे की सूचना देने में देरी किए जाने के आरोप लगाए हैं। आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ कि ड्यूटी कर रहे गार्ड की जान चली गई?
दरअसल, यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित पनकी थाना क्षेत्र के एक अपार्टमेंट का है। यहां 50 वर्षीय विक्रम सिंह सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते थे। वह पनकी की शिवनगर डूडा कॉलोनी के निवासी थे और पिछले करीब तीन महीने से अपार्टमेंट में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शुक्रवार देर रात उनकी ड्यूटी के दौरान यह दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने एक परिवार की खुशियां छीन लीं।
जानकारी के मुताबिक, रात करीब डेढ़ बजे एक कार अपार्टमेंट में पहुंची। कार को अंदर जाने देने के लिए विक्रम सिंह ने गेट खोला। कार के अंदर जाने के बाद जब वह गेट बंद करने लगे, तो उसमें परेशानी आने लगी। इसके बाद उन्होंने गेट को दोबारा खोलने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान भारी-भरकम लोहे का गेट अचानक उनके ऊपर गिर पड़ा। करीब चार क्विंटल वजनी गेट के नीचे दबने से विक्रम गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। विक्रम सिंह गेट के नीचे दब गए थे और उन्हें बाहर निकालना बेहद जरूरी था। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें हादसे की भयावहता को लेकर चर्चा हो रही है। बताया गया है कि गंभीर रूप से घायल विक्रम को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि अपार्टमेंट का लोहे का गेट पिछले करीब दस दिनों से खराब था। परिजनों के मुताबिक, यदि गेट की समय रहते मरम्मत करा दी जाती, तो शायद यह हादसा टल सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुर्घटना की सूचना देने में देरी की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह पता लगाना भी जरूरी है कि गेट की खराबी की जानकारी संबंधित जिम्मेदार लोगों को थी या नहीं और उसकी मरम्मत के लिए क्या कदम उठाए गए थे।
इस हादसे ने अपार्टमेंट और आवासीय परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भारी लोहे के गेट रोजाना लोगों और वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में उनका सही स्थिति में होना बेहद जरूरी है। यदि किसी गेट में तकनीकी खराबी आ जाती है, तो उसकी तुरंत मरम्मत कराना और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल रोकना आवश्यक है। लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विक्रम सिंह की मौत को टाला जा सकता था? क्या गेट की खराबी की शिकायत मिलने के बाद भी उसकी मरम्मत नहीं कराई गई थी? और हादसे के बाद घायल गार्ड को अस्पताल पहुंचाने तथा परिजनों को सूचना देने में कोई देरी हुई थी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल इस दर्दनाक घटना ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और आवासीय परिसरों में काम करने वाले सुरक्षा कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।


