भारत के बंदरगाहों पर माल की निकासी तेज करने और जहाजों के इंतजार का समय कम करने के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटलीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नीदरलैंड के रॉटरडैम में बताया कि भारतीय सीमा शुल्क प्राधिकरण और रॉटरडैम बंदरगाह प्राधिकरण मिलकर भारत में कार्गो से जुड़ी प्रक्रियाओं को आधुनिक और डिजिटल बनाने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य माल की तेज निकासी करना और जहाजों के बंदरगाह पर रुकने की अवधि कम करना है।
पीयूष गोयल ने रविवार, 25 अक्टूबर को रॉटरडैम बंदरगाह का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बंदरगाह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बौडेविज्न सीमेंस से मुलाकात की और बंदरगाह प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी बंदरगाह क्षमता में और सुधार करने की जरूरत है, ताकि देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत ने पिछले एक दशक में अपनी बंदरगाह क्षमता को दोगुना किया है। इसके बावजूद भविष्य की जरूरतों को देखते हुए क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक बंदरगाह क्षमता को अगले दो दशकों में दो बार दोगुना करना है। इससे आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
बंदरगाहों पर कार्गो की निकासी में लगने वाला समय व्यापार की लागत और गति को प्रभावित करता है। यदि प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जाता है, तो दस्तावेजों के प्रबंधन, सूचनाओं के आदान-प्रदान और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे माल की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकती है। हालांकि, इस सहयोग के तहत लागू किए जाने वाले विशेष उपायों और उनकी समयसीमा की विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
पीयूष गोयल ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के कारोबारियों और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। बेहतर बंदरगाह सुविधाएं और तेज कार्गो निकासी भारत तथा यूरोप के बीच व्यापार को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती हैं।
रॉटरडैम बंदरगाह यूरोप का सबसे बड़ा बंदरगाह है। यह भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों तक पहुंचाने और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में भारत और रॉटरडैम के बीच सहयोग को व्यापारिक संबंध मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। मंत्री की यात्रा ने यूरोप के बाजारों तक पहुंच बनाने में नीदरलैंड के रणनीतिक महत्व को भी रेखांकित किया।
इस बीच, एम्स्टर्डम में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने भारतीय पेशेवरों और शिक्षाविदों से देश के संस्थानों के साथ जुड़ने की अपील की। उन्होंने उनसे भारतीय स्टार्टअप को मार्गदर्शन देने और युवाओं को आगे बढ़ाने में सहयोग करने का आग्रह किया।
युवाओं की भूमिका पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि युवाओं को अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिस देश में व्यक्ति काम करता है और अपने परिवार का भरण-पोषण करता है, उसके प्रति जिम्मेदारी और निष्ठा महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, भारत और रॉटरडैम बंदरगाह प्राधिकरण के बीच डिजिटलीकरण को लेकर चल रहा सहयोग देश की व्यापारिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। बंदरगाह क्षमता बढ़ाने, कार्गो निकासी तेज करने और भारत-यूरोप व्यापार को प्रोत्साहित करने के प्रयास आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक प्रगति के लिए अहम साबित हो सकते हैं।


