भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने मई 2026 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों, भीषण गर्मी और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद देश में वाहन बिक्री ने रिकॉर्ड स्तर हासिल किया। ऑटोमोबाइल डीलरों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स (FADA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में कुल मोटर वाहन खुदरा बिक्री 9.55 प्रतिशत बढ़कर 25,31,067 इकाई पर पहुंच गई।
पिछले वर्ष मई 2025 में यह आंकड़ा 23,10,451 इकाई था। इस तरह एक वर्ष के भीतर वाहन बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। खास बात यह रही कि आमतौर पर मई का महीना ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अपेक्षाकृत कमजोर माना जाता है, लेकिन इस बार बिक्री ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए।
फाडा की रिपोर्ट के अनुसार यात्री वाहन, तिपहिया वाहन और ट्रैक्टर श्रेणियों में अब तक की सबसे अधिक खुदरा बिक्री दर्ज की गई। यात्री वाहन बिक्री में 23.25 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हुई और यह रिकॉर्ड 4,02,591 इकाई तक पहुंच गई। वहीं दोपहिया वाहनों की बिक्री 7.54 प्रतिशत बढ़कर 18,44,947 इकाई रही।
तिपहिया वाहनों की बिक्री 3.56 प्रतिशत बढ़कर 1,11,526 इकाई पर पहुंची, जबकि वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 5.29 प्रतिशत बढ़कर 83,823 इकाई रही। ट्रैक्टर बिक्री में भी दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण ग्राहकों का रुझान तेजी से ईंधन-किफायती और वैकल्पिक पावरट्रेन वाहनों की ओर बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा असर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री में देखने को मिला। दोपहिया ईवी की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 9.25 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष 6.11 प्रतिशत थी।
फाडा अध्यक्ष सी. एस. विग्नेश्वर के अनुसार अत्यधिक गर्मी, ईंधन कीमतों का दबाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार ने मजबूती दिखाई है। उन्होंने कहा कि यात्री वाहन और ट्रैक्टर श्रेणी ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि अधिकांश वाहन वर्गों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
आगे की संभावनाओं पर नजर डालें तो उद्योग का दृष्टिकोण सतर्क लेकिन सकारात्मक दिखाई देता है। डीलरों के सर्वेक्षण के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक डीलर जून में भी बिक्री बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। मानसून की प्रगति, खरीफ फसल की बुवाई, ग्रामीण आय में सुधार और शादी के मौसम का प्रभाव आने वाले महीनों में मांग को और मजबूत कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता, बेहतर वित्तपोषण सुविधाएं और ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताएं भारतीय ऑटो उद्योग को नई दिशा दे रही हैं। यदि यही रुझान जारी रहा तो वर्ष 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अब तक के सबसे सफल वर्षों में शामिल हो सकता है।


