मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान का दावा है कि दक्षिणी क्षेत्र में हुए अमेरिकी हवाई हमलों के कारण तटीय शहर सिरिक में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है, जिससे हजारों लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में पानी संग्रह करने वाले दो बड़े टैंक और एक टेलीकम्युनिकेशन टावर क्षतिग्रस्त हो गए। इसके बाद पूरे इलाके में जलापूर्ति प्रभावित हुई है। ईरान ने इस कार्रवाई को नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला बताते हुए गंभीर मानवीय चिंता का विषय बताया है।
मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सिरिक में पानी के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने से स्थानीय नागरिकों के लिए पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ईरान का कहना है कि नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना मानवाधिकारों के खिलाफ है।
दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने अपने ऑपरेशन को आत्मरक्षा और सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई बताया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम कथित तौर पर ईरान समर्थित गतिविधियों और हालिया सैन्य घटनाओं के जवाब में उठाया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान के कई एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
उधर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है। ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यदि अमेरिका ने आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखी तो उसका और अधिक कड़ा जवाब दिया जाएगा।
ईरानी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में देर रात धमाकों की आवाजें सुनी गईं। होर्मोज़गन प्रांत, बंदर अब्बास और सिरिक क्षेत्र में गतिविधियां तेज हो गई हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम को लेकर चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव और बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या तनाव कूटनीतिक बातचीत के जरिए कम होगा या फिर यह संघर्ष और बड़े संकट का रूप ले सकता है।
मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बन सकते हैं।


