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AI की बढ़ती भूख! डेटा सेंटर पी रहे अरबों लीटर पानी, कई देशों में शुरू हुआ विरोध

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जितनी तेजी से दुनिया को बदल रहा है, उतनी ही तेजी से इसके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। अमेरिका, कनाडा और कई अन्य देशों में डेटा सेंटरों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। लोगों का कहना है कि AI को चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशाल डेटा सेंटर पानी, बिजली और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डाल रहे हैं।

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार AI तकनीक के विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में AI उद्योग की पानी की खपत कई देशों की आबादी की जरूरतों के बराबर पहुंच सकती है।

संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय की रिपोर्ट ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक AI और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार ऊर्जा, जल संसाधनों और भूमि पर अभूतपूर्व दबाव बना रहा है। यह सिर्फ तकनीकी विकास का मामला नहीं रह गया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की स्थिरता से जुड़ा एक बड़ा वैश्विक मुद्दा बन चुका है।

विशेषज्ञों के अनुसार बड़े AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए हजारों हाई-परफॉर्मेंस सर्वर लगातार काम करते हैं। इन सर्वरों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा डेटा सेंटरों की बिजली खपत भी कई छोटे शहरों के बराबर हो सकती है।

यही कारण है कि कई क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय नए डेटा सेंटरों के निर्माण का विरोध कर रहे हैं। लोगों का तर्क है कि उनके क्षेत्र में उपलब्ध पानी और बिजली पहले ही सीमित है और ऐसे में बड़े डेटा सेंटर संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं।

हालांकि AI उद्योग का कहना है कि यह तकनीक स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और उद्योगों में बड़े बदलाव ला सकती है। कंपनियां दावा कर रही हैं कि वे अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण अनुकूल डेटा सेंटर विकसित करने पर काम कर रही हैं। इसके बावजूद पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि AI के विस्तार के साथ संसाधनों के उपयोग पर सख्त निगरानी और स्पष्ट नीतियां बनाना जरूरी होगा।

तकनीकी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अब दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारें, टेक कंपनियां और समाज मिलकर AI के बढ़ते प्रभावों का समाधान कैसे खोजते हैं।

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