NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर देश की राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई करने के बजाय छात्रों को निशाना बना रही है। उन्होंने इस फैसले को ‘चोर को पकड़ने के बजाय पीड़ित के दरवाजे पर ताला लगाने’ जैसा बताया।
दरअसल, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के अनुरोध पर भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर सीमित अवधि के लिए रोक लगाई गई है। यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक लागू रहेगा, जिसमें NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा का दिन और उसके बाद का समय भी शामिल है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि लाखों छात्र वर्षों से टेलीग्राम का उपयोग पढ़ाई के लिए कर रहे हैं। छात्र यहां नोट्स, टेस्ट सीरीज़, चर्चा और परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में इस सुविधा को बंद करना पेपर लीक की समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यही तरीका अपनाया जाएगा तो अगला प्रतिबंध किस पर लगेगा? क्या व्हाट्सएप पर भी रोक लगा दी जाएगी?
राहुल गांधी ने परीक्षा व्यवस्था पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दिन छात्रों की तलाशी ली जाएगी, जेबें काटी जाएंगी, प्रश्न पत्र एयर फोर्स के जरिए भेजे जाएंगे, लेकिन असली समस्या की जड़ पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक माफिया सरकार की नाक के नीचे सक्रिय है और देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि छात्रों को परेशान करने के बजाय असली दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
दूसरी तरफ, सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
जानकारी के मुताबिक, NTA ने आरोप लगाया था कि कुछ संगठित नकल गिरोह टेलीग्राम का इस्तेमाल करके 21 जून को होने वाली NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को गुमराह करने और उनके साथ धोखाधड़ी करने की कोशिश कर रहे थे।
इसी कारण प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया गया।
हालांकि, इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे परीक्षा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे छात्रों के हितों के खिलाफ बता रहा है।
फिलहाल, पूरे मामले पर देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह फैसला कितना प्रभावी साबित होता है और क्या इससे पेपर लीक जैसी समस्याओं पर रोक लग पाएगी।


