Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

सोने पर 15% आयात शुल्क का बड़ा असर, देश में Gold Import 70% घटा

भारत सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। सरकार के इस फैसले के बाद देश में सोने के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार, आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद देश में गोल्ड इम्पोर्ट करीब 70 प्रतिशत तक घट गया है।

सरकार ने यह नया नियम 13 मई 2026 से लागू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को कम करना और देश के बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है। इस फैसले के बाद देश में सोने का आयात घटकर लगभग 25 से 30 टन तक पहुंच गया है।

हालांकि एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया है कि मात्रा में गिरावट आने के बावजूद मूल्य के हिसाब से सोने का आयात बढ़ा है। मई महीने में सोने का आयात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की ऊंची कीमतें बताई जा रही हैं।

इसके अलावा अप्रैल और मई के दौरान सोने का कुल आयात 60.14 प्रतिशत बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर दर्ज किया गया। हालांकि मात्रा के हिसाब से इसमें 4.76 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 721.03 टन रहा।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। चीन के बाद भारत में सोने की मांग सबसे अधिक रहती है। देश में सोने का उपयोग मुख्य रूप से आभूषण उद्योग, निवेश और पारंपरिक खरीदारी के लिए किया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने का अधिक आयात देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाता है। इसी वजह से सरकार अब जरूरी वस्तुओं के आयात को प्राथमिकता देना चाहती है। इनमें कच्चा तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चा माल और पूंजीगत वस्तुएं शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले कई बार लोगों से जरूरत के अनुसार खरीदारी करने और अनावश्यक विदेशी मुद्रा खर्च को कम करने की अपील कर चुके हैं। सरकार का मानना है कि अगर गैर-जरूरी आयात पर नियंत्रण रखा जाए तो देश की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।

इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितताओं की वजह से भारत की आयात लागत और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सरकार विदेशी मुद्रा का उपयोग उन क्षेत्रों में करना चाहती है, जो सीधे आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आने वाले महीनों में आयात शुल्क बढ़ाने का असर ज्वेलरी बाजार और उपभोक्ता मांग पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि इससे देश के चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल सरकार की यह रणनीति विदेशी मुद्रा बचाने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles