यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। स्पेन, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम समेत कई देशों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी के कारण हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। बिजली कटौती, पानी की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि 21 जून के बाद से पूरे यूरोप में 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। वहीं विभिन्न देशों के स्वास्थ्य आंकड़ों को मिलाकर स्पेन और फ्रांस में गर्मी से जुड़ी मौतों का आंकड़ा 2,000 से अधिक पहुंच गया है। WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है और यहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है।
फ्रांस इस भीषण हीटवेव से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक मई में लगातार कई दिनों तक असामान्य गर्मी रही, जिसके बाद जून में रिकॉर्ड तोड़ 11 दिनों तक हीटवेव चली। इस दौरान करीब 1,000 लोगों की मौत दर्ज की गई। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मौतों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने सप्ताहांत और अगले सप्ताह भी तापमान ऊंचा बने रहने की संभावना जताई है।
स्पेन में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। कार्लोस-III हेल्थ इंस्टीट्यूट के अनुसार, हालिया हीटवेव के दौरान गर्मी से जुड़ी कम से कम 1,028 मौतें दर्ज की गई हैं। राष्ट्रीय मौसम एजेंसी AEMET के मुताबिक यह आंकड़ा पिछले वर्ष जून में दर्ज 407 मौतों से दोगुने से भी अधिक है। अधिकारियों का कहना है कि यह हाल के वर्षों की सबसे गंभीर गर्मी की घटनाओं में से एक है।
यूनाइटेड किंगडम में भी रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, जून महीने में 37.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जिसने 1957 से चले आ रहे पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि कुछ इलाकों में तापमान में हल्की गिरावट आई है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों ने जल्द ही एक और गर्मी की लहर आने की आशंका जताई है।
भीषण गर्मी का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। कई शहरों में बिजली की मांग बढ़ने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है, जबकि पानी की कमी ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। कुछ क्षेत्रों में स्कूल बंद करने पड़े हैं और प्रशासन लोगों से दिन के समय घरों में रहने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस लंबे समय तक चलने वाली गर्मी की मुख्य वजह ‘ओमेगा ब्लॉक’ नामक मौसम प्रणाली है। इसमें उच्च दबाव का एक बड़ा क्षेत्र दो निम्न दबाव वाले क्षेत्रों के बीच फंस जाता है। इससे आसमान लंबे समय तक साफ रहता है, बादल नहीं बनते और तापमान लगातार कई दिनों तक बेहद ऊंचा बना रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी भीषण हीटवेव की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिल रही हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने और तेज धूप से बचने की सलाह दे रही हैं।


