अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के निधन के बाद ईरानी मीडिया और सरकारी मंचों से आई प्रतिक्रियाओं ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह के दावे और अटकलें तेजी से वायरल हो रही हैं, हालांकि इनमें से कई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान के प्रमुख अखबार हमशहरी ने अपने पहले पन्ने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक प्रतीकात्मक तस्वीर प्रकाशित की। तस्वीर में ट्रंप के साथ अमेरिका और इजराइल के कई शीर्ष नेताओं को दिखाया गया और उसके ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा गया— “अचानक मौत के लिए तैयार रहो।” इस संदेश को कई विश्लेषकों ने अमेरिका और इजराइल के नेतृत्व के लिए कड़ी राजनीतिक चेतावनी के रूप में देखा।
यहीं नहीं, ईरान के एक अन्य प्रमुख अखबार वतन एमरोज़ ने भी लिंडसे ग्राहम के निधन को प्रमुखता से प्रकाशित किया। अखबार ने ग्राहम को ईरान विरोधी नीतियों का सबसे मुखर समर्थक बताते हुए लिखा कि वे वर्षों से तेहरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों और सैन्य कार्रवाई की वकालत करते रहे थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनकी मृत्यु अचानक आई बीमारी के कारण हुई, लेकिन उनके राजनीतिक रुख पर तीखी टिप्पणी भी की गई।
विवाद उस समय और गहरा गया जब ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक कार्यक्रम में समाचार प्रस्तोता ने ग्राहम के निधन पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान विरोधी अमेरिकी नेता के “जहन्नुम भेजे जाने” पर ईरानी जनता को बधाई दी जानी चाहिए। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया, जबकि ईरान समर्थक वर्ग ने इसे अमेरिकी नीतियों के प्रति अपनी नाराजगी का प्रतीक बताया।
इस बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई तरह की साजिशी थ्योरी भी वायरल होने लगीं। कुछ यूज़र्स ने ग्राहम की मौत को सामान्य घटना मानने से इनकार किया, जबकि कई लोगों ने बिना किसी आधिकारिक प्रमाण के अलग-अलग दावे करने शुरू कर दिए। हालांकि अभी तक इन दावों की किसी स्वतंत्र एजेंसी या अमेरिकी प्रशासन द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लिंडसे ग्राहम के कार्यालय ने बताया कि शुरुआती मेडिकल जांच में उनकी मौत का कारण महाधमनी (एओर्टा) का फटना बताया गया है। यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति होती है, जो कई मामलों में अचानक जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल यही आधिकारिक कारण माना जा रहा है।
इसके बावजूद कुछ दक्षिणपंथी अमेरिकी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने अलग-अलग दावे किए हैं। इनमें से कुछ ने बिना किसी प्रमाण के यह आशंका जताई कि ग्राहम को ज़हर दिया गया हो सकता है और उनकी टॉक्सिकोलॉजी जांच की मांग की। इन दावों का समर्थन करने वाला कोई आधिकारिक सबूत अब तक सामने नहीं आया है।
लिंडसे ग्राहम लंबे समय तक अमेरिकी विदेश नीति में ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने कई बार ईरान पर कठोर प्रतिबंध, सैन्य दबाव और कड़े कदम उठाने की खुलकर वकालत की थी। यही वजह है कि ईरानी मीडिया ने उनके निधन को केवल एक राजनीतिक घटना नहीं बल्कि अपने कट्टर विरोधी के अंत के रूप में प्रस्तुत किया।
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप के लिए ग्राहम का निधन एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है क्योंकि वे उनके करीबी सहयोगियों में शामिल थे। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है, ईरानी मीडिया की आक्रामक भाषा और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट अटकलों ने अंतरराष्ट्रीय माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी ग्राहम की मौत को चिकित्सीय कारणों से हुई प्राकृतिक मृत्यु बताती है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय साजिश या हत्या की पुष्टि किसी सरकारी एजेंसी ने नहीं की है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को सावधानी से देखने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी जा रही है।


