ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों का उपयोग हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त जहाजों के मुआवजे के लिए किया गया, तो वह संबंधित देशों और कंपनियों के वाणिज्यिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने से रोक सकता है।
यह बयान ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता के हवाले से ईरानी सरकारी मीडिया IRIB में प्रकाशित किया गया। बयान में अमेरिका की उस कथित योजना की आलोचना की गई, जिसमें ईरान की फ्रीज संपत्तियों का इस्तेमाल संघर्ष के दौरान हुए समुद्री नुकसान की भरपाई के लिए किए जाने की बात कही गई है।
ईरान ने क्या कहा?
ईरानी पक्ष का कहना है कि यदि कोई देश या कंपनी अमेरिका की इस योजना का समर्थन करती है या ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति का उपयोग करती है, तो ईरान ऐसे देशों और कंपनियों के जहाजों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। बयान के अनुसार, ऐसे जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ईरान ने इस प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताते हुए कहा कि उसकी संपत्तियों का उसकी सहमति के बिना उपयोग स्वीकार्य नहीं है।
ट्रंप के बयान के बाद बढ़ा विवाद
यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर किए गए एक पोस्ट के बाद सामने आई। पोस्ट में ट्रंप ने कहा था कि भविष्य में जहाजों, कार्गो या अन्य समुद्री संपत्तियों को होने वाले नुकसान की भरपाई अमेरिका के नियंत्रण में मौजूद ईरानी धन से की जा सकती है।
हालांकि, इस संबंध में अमेरिका की ओर से किसी आधिकारिक नीति या कानूनी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर असर डाल सकता है।
बढ़ सकती है वैश्विक चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर तनाव और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के बयानों तक सीमित है और आगे की स्थिति कूटनीतिक तथा राजनीतिक फैसलों पर निर्भर करेगी।


