फीफा विश्व कप 2026 के आगाज से पहले ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को बड़ी राहत मिली है। लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बाद आखिरकार ईरानी खिलाड़ियों को अमेरिका में प्रवेश के लिए वीजा जारी कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच राजनीतिक संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार ईरान की टीम का पहला मुकाबला 17 जून को लॉस एंजिलिस में खेला जाना है। मैच से कुछ दिन पहले तक खिलाड़ियों को वीजा नहीं मिलने के कारण टीम की तैयारियों और यात्रा कार्यक्रम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि अब खिलाड़ियों को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिल गई है, जिससे टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों ने राहत की सांस ली है।
रिपोर्ट्स के अनुसार व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि ईरानी खिलाड़ियों को वीजा जारी कर दिया गया है। वहीं तुर्किये में अमेरिका के राजदूत टॉम बैरक ने भी बताया कि अंकारा स्थित अमेरिकी दूतावास ने वीजा प्रक्रिया को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हालांकि खिलाड़ियों को वीजा मिलने के बावजूद कुछ समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। जानकारी के अनुसार टीम के तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ के कुछ सदस्यों के वीजा आवेदन अब भी लंबित हैं। इस वजह से टीम की तैयारियों को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि इस संबंध में ईरानी फुटबॉल महासंघ की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस बार का फीफा विश्व कप खेल के साथ-साथ राजनीतिक चर्चाओं का भी केंद्र बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों के कारण इस मामले पर वैश्विक स्तर पर नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि खेल और राजनीति का यह संगम विश्व कप के दौरान भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों से ईरान ने अपनी टीम के प्रशिक्षण शिविर की मूल योजना में बदलाव किया है। पहले टीम का बेस कैंप अमेरिका के एरिजोना में प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे मेक्सिको के तिजुआना शहर में स्थानांतरित कर दिया गया। इस फैसले का उद्देश्य अमेरिका में टीम की मौजूदगी को सीमित रखना बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार ईरानी टीम तिजुआना पहुंचकर अपने विश्व कप अभियान की अंतिम तैयारियों को पूरा करेगी। खिलाड़ियों को समय पर वीजा मिल जाना टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे उनकी यात्रा और अभ्यास कार्यक्रम प्रभावित होने से बच गया है।
अब फुटबॉल प्रेमियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राजनीतिक तनाव और वीजा विवाद के बीच ईरान की टीम विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर कैसा प्रदर्शन करती है। खिलाड़ियों के लिए यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता साबित करने का भी बड़ा अवसर होगा।


