कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक बड़ी खबर सामने आई है। केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए करीब 13.14 करोड़ रुपये कीमत की हाइड्रोपोनिक कैनबिस यानी गांजा जब्त किया है। इस मामले में बैंकॉक से आए छह यात्रियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई दो अलग-अलग मामलों में की गई, जिसमें कुल 38.34 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक कैनबिस बरामद हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सभी यात्री थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक से बेंगलुरु पहुंचे थे। शुरुआती जांच में पता चला कि तस्करों ने ड्रग्स को बेहद चालाकी से अपने हैंड बैगेज और चेक-इन लगेज में छिपाकर भारत लाने की कोशिश की थी।
हालांकि एयरपोर्ट पर नियमित सुरक्षा जांच और कस्टम अधिकारियों की सतर्कता की वजह से उनके सामान पर संदेह हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने विस्तृत जांच की, जिसमें बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद कर लिया गया।
हाइड्रोपोनिक कैनबिस सामान्य गांजे से काफी अलग होती है। इसे मिट्टी के बजाय नियंत्रित वातावरण और पोषक तत्वों की मदद से उगाया जाता है। इसकी गुणवत्ता और नशीला प्रभाव सामान्य कैनबिस की तुलना में अधिक माना जाता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत भी काफी ज्यादा होती है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत के बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर हाइड्रोपोनिक कैनबिस की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। ड्रग्स तस्कर विदेशों से इस तरह के प्रतिबंधित पदार्थों को भारत लाने के लिए नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं।
कस्टम विभाग ने सभी छह यात्रियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं और भारत में इस खेप को किसे पहुंचाया जाना था।
अधिकारियों का मानना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट काम कर रहा हो सकता है। जांच के दौरान यात्रियों के मोबाइल फोन, यात्रा रिकॉर्ड और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
इस मामले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस यानी एनडीपीएस एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर आधुनिक स्कैनिंग तकनीक और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण इस तरह की तस्करी को रोकने में मदद मिल रही है। हालांकि ड्रग्स तस्कर लगातार नए तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को भी लगातार सतर्क रहना पड़ता है।
यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी का खतरा लगातार बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए सख्त निगरानी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।


