अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित ऐतिहासिक शांति समझौते (US-Iran Peace Treaty) को लेकर चल रही अटकलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने विराम लगा दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance आगामी शुक्रवार को Switzerland में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
फ्रांस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे स्वयं इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा, “मैं शामिल हो भी सकता हूं और नहीं भी।”
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि ट्रंप, जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf पहले ही फ्रेमवर्क समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर कर चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, औपचारिक हस्ताक्षर समारोह के बाद पूरे समझौता ज्ञापन (MoU) को सार्वजनिक किया जा सकता है। ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि शुक्रवार के बाद दस्तावेज़ जारी किया जाएगा।
उधर, जेडी वेंस ने एक टीवी इंटरव्यू में पुष्टि की कि समझौते पर रविवार को डिजिटल हस्ताक्षर किए गए थे और दस्तावेज़ जल्द ही सार्वजनिक हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य शिपिंग बहाल करने की तैयारी
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Strait of Hormuz के जरिए सामान्य समुद्री व्यापार बहाल करना है। शुक्रवार तक इस जलमार्ग को पूरी तरह खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
बताया गया है कि तेल और गैस के बड़े टैंकरों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सके। हालांकि, समुद्री मार्ग में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाने में कुछ समय लग सकता है।
अधिकारी ने कहा कि अगले एक से दो सप्ताह के भीतर समुद्री यातायात में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में अगले 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से टोल-फ्री आवाजाही की व्यवस्था भी शामिल है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से होकर गुजरती है। इसलिए इस क्षेत्र में स्थिरता आने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, अंतिम समझौता दस्तावेज़ सार्वजनिक होने और दोनों देशों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।


