फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने भारत समेत दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे रूस के तेल कारोबार पर नई सख्ती लागू हो सकती है और इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
दरअसल, ईरान संकट और वैश्विक तेल बाजार में लंबे समय तक बनी अनिश्चितता के बीच अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने में राहत दी थी, ताकि दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित न हो और कीमतें नियंत्रण में बनी रहें।
लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और इसी के साथ ट्रंप प्रशासन रूस को दी गई छूट खत्म करने पर विचार कर रहा है।
अगर ऐसा होता है तो अमेरिका एक बार फिर रूस की तेल से होने वाली कमाई को निशाना बनाएगा, ताकि यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर दबाव बढ़ाया जा सके।
केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन, कनाडा और अन्य G7 देशों ने भी रूस के तेल कारोबार पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का सबसे प्रभावी तरीका उसकी ऊर्जा आय को सीमित करना है।
अब सवाल यह है कि इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा?
पिछले कई महीनों में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदा है। यही वजह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में ईंधन कीमतों पर अपेक्षाकृत कम दबाव देखने को मिला।
लेकिन अगर अमेरिका रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध लागू करता है, तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल खरीदना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भुगतान प्रणाली, शिपिंग व्यवस्था और बीमा सेवाओं से जुड़ी कई नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इससे तेल आयात महंगा हो सकता है और उसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में 17 जून की समय सीमा बेहद अहम मानी जा रही है। रूसी तेल पर दी गई अमेरिकी छूट की अवधि इसी दिन समाप्त हो रही है। यदि इसे आगे नहीं बढ़ाया गया तो वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर अस्थिरता बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी G7 सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और दुनिया को मिलकर स्थायी समाधान तलाशना होगा।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक रूस से भारत के तेल आयात पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध लागू नहीं किया गया है। फिलहाल यह संभावित नीति बदलाव और G7 देशों की रणनीतिक चर्चाओं का हिस्सा है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका 17 जून के बाद क्या फैसला लेता है और उसका वैश्विक तेल बाजार पर कितना असर पड़ता है।


