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उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल; संजय राउत बोले- एकनाथ शिंदे ने गद्दारों को जन्म दिया

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना (यूबीटी) के सांसद Sanjay Raut ने बागी नेताओं और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde पर तीखा हमला बोला।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए संजय राउत ने बागी सांसदों को ‘गद्दार’ करार दिया। उन्होंने लिखा कि अब उनके कर्मों का हिसाब शुरू हो चुका है और आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें इसी पहचान से याद करेंगी।

इसके बाद शिवसेना (यूबीटी) विधायकों की बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में राउत ने अपनी नाराजगी और तेज करते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे ने छह गद्दारों को जन्म दिया है और अब हालात को संभालने के लिए आगे ‘सिजेरियन सर्जरी’ करनी पड़ेगी।

कौन-कौन सांसद शिंदे गुट में हुए शामिल?

शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), नागेश पाटिल-आष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजे निंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) शामिल हैं।

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र में नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, हालिया घटनाक्रम के बाद पार्टी के संसदीय दल में बड़ा विभाजन सामने आ गया है।

शिंदे बोले- ‘ऑपरेशन टाइगर’ हुआ सफल

इस मौके पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि ये सभी सांसद अब उस ‘असली शिवसेना’ में शामिल हो गए हैं, जो दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों पर चलती है।

उन्होंने कहा कि जून 2022 में उन्होंने शिवसेना को बचाने और बालासाहेब ठाकरे के विचारों की रक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया था। अब यह दूसरा चरण है, जिसका उद्देश्य शिवसेना का विस्तार करना है।

शिंदे ने कहा, “चार साल पहले मैंने बड़ा फैसला लिया था और अब हमने छक्का लगाया है। ऑपरेशन टाइगर अब पूरी तरह सफल हो चुका है।”

महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ेगा असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन बदल सकता है। इससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी की संगठनात्मक स्थिति प्रभावित हो सकती है, जबकि शिंदे गुट की राजनीतिक पकड़ और मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।

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