भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों देशों के रिश्तों को “बेहद मजबूत” बताते हुए कहा है कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय दौरे और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सकारात्मक प्रगति देखने को मिलेगी।
वॉशिंगटन डीसी में मीडिया से बातचीत के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सभी स्तरों पर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। उनके अनुसार दोनों देशों के रिश्ते पहले से अधिक मजबूत हैं और यही वजह है कि व्यापार, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है।
मार्को रुबियो ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित ट्रेड डील पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश जल्द ही इस समझौते को अंतिम रूप देने में सफल होंगे। यदि यह समझौता होता है तो भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर मिल सकते हैं, जबकि अमेरिका की कंपनियों के लिए भारत में निवेश और कारोबार के नए रास्ते खुल सकते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
रुबियो ने यह भी जानकारी दी कि वह इस वर्ष के अंत से पहले भारत आने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी भी दोनों देशों के बीच चल रही है। हालांकि यात्रा की आधिकारिक तारीख का ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन दोनों सरकारें इस दिशा में लगातार समन्वय कर रही हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
भारत और अमेरिका के बीच हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण, अत्याधुनिक तकनीक, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और क्वाड जैसे मंचों पर सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देश वैश्विक चुनौतियों से निपटने और आपसी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भी लगातार मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में संभावित ट्रेड डील और उच्चस्तरीय यात्राओं को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि हाल के समय में व्यापारिक शुल्क, रूस से ऊर्जा आयात और कुछ अन्य आर्थिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी देखने को मिले हैं। इसके बावजूद भारत और अमेरिका ने बातचीत का रास्ता बनाए रखा है और विवादित मुद्दों का समाधान आपसी संवाद के माध्यम से निकालने पर जोर दिया है। यही कारण है कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित ट्रेड डील सफल होती है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार होता है, तो इससे भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा मिलेगी। व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी और मजबूत हो सकती है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के रिश्ते और अधिक गहरे होने की संभावना है।


