भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत रूस के आर्कटिक क्षेत्र से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की खरीद के विकल्प पर विचार कर रहा है। यदि दोनों देशों के बीच इस दिशा में समझौता होता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति को नया आधार मिल सकता है और प्राकृतिक गैस के आयात के नए स्रोत भी उपलब्ध हो सकते हैं।
रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको ने कहा कि भारत और रूस तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही रूस की कई ऊर्जा परियोजनाओं में भागीदारी कर रहा है और भविष्य में LNG क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ सकता है।
आर्कटिक LNG क्यों है अहम?
रूस के आर्कटिक क्षेत्र में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं। इस गैस को तरल रूप (LNG) में बदलकर समुद्री मार्ग से लंबी दूरी तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इससे भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक अतिरिक्त और संभावित रूप से भरोसेमंद स्रोत मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समुद्री परिवहन पर भी बढ़ सकता है सहयोग
रूस ने यह भी संकेत दिया है कि दोनों देश लॉजिस्टिक्स और समुद्री परिवहन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें व्लादिवोस्तोक–चेन्नई समुद्री कॉरिडोर और नॉर्दर्न सी रूट (Northern Sea Route) के उपयोग की संभावनाएं शामिल हैं।
यदि इन परियोजनाओं पर प्रगति होती है, तो भारत और रूस के बीच ऊर्जा, खनिज और अन्य वस्तुओं के परिवहन में समय और लागत दोनों कम हो सकते हैं।
यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा ऊर्जा सहयोग
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया। भारत का लगातार यही रुख रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद का निर्णय राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
रूस आज भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच तेल, गैस तथा अन्य ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग जारी है।
अमेरिकी प्रतिबंधों की चर्चा भी तेज
इस बीच, अमेरिका में रूस की ऊर्जा खरीद से जुड़े देशों पर संभावित प्रतिबंधों को लेकर चर्चा जारी है। अमेरिकी संसद में रूस की ऊर्जा बिक्री से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया गया है। हालांकि, अभी किसी संभावित कार्रवाई का असर भविष्य के निर्णयों और नीतियों पर निर्भर करेगा।
भारत ने पहले भी स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप विभिन्न देशों से आयात करता रहेगा और उसका प्राथमिक उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम हो सकता है समझौता
यदि भारत और रूस के बीच आर्कटिक LNG को लेकर कोई औपचारिक समझौता होता है, तो इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प मिल सकते हैं। वहीं रूस के लिए भारत एक बड़ा और विश्वसनीय ऊर्जा बाजार बना रहेगा। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में दोनों देशों की ऊर्जा साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।


