दुनिया की प्रमुख खुफिया एजेंसियों की बात होती है तो भारत की रॉ (RAW), अमेरिका की CIA, इजराइल की मोसाद (Mossad) और पाकिस्तान की ISI का नाम अक्सर सामने आता है। वहीं, चीन की खुफिया एजेंसी अपेक्षाकृत कम चर्चा में रहती है। चीन की प्रमुख नागरिक खुफिया एजेंसी का नाम मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी (MSS) है, जिसे देश की आंतरिक और बाहरी खुफिया गतिविधियों के लिए प्रमुख एजेंसी माना जाता है।
हाल के वर्षों में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन में MSS की गतिविधियों और उसके वैश्विक नेटवर्क को लेकर कई दावे सामने आए हैं। हालांकि, चीन इन आरोपों को कई बार खारिज करता रहा है।
क्या है MSS?
मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी (MSS) चीन की प्रमुख नागरिक खुफिया और सुरक्षा एजेंसी है। इसका मुख्य कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों, विदेशी खुफिया जानकारी जुटाने, जासूसी गतिविधियों की रोकथाम और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा करना माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह एजेंसी चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और विभिन्न देशों में होने वाले घटनाक्रमों पर भी नजर रखती है।
क्या कहते हैं अंतरराष्ट्रीय आकलन?
कई पश्चिमी देशों की सुरक्षा एजेंसियों और शोध संस्थानों की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीन की खुफिया गतिविधियां पारंपरिक जासूसी से आगे बढ़ चुकी हैं। इन रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों—जैसे शिक्षा, व्यापार, अनुसंधान, तकनीक और अन्य माध्यमों—के जरिए सूचनाएं एकत्र करने और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, इन दावों पर चीन का कहना रहा है कि वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता और उस पर लगाए गए कई आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, साइबर सुरक्षा और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों के चलते सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क रहती हैं। समय-समय पर भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर कई कदम उठाए हैं, जिनमें कुछ विदेशी ऐप्स पर प्रतिबंध, संवेदनशील क्षेत्रों में तकनीकी उपकरणों की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा नियमों को सख्त करना शामिल है।
हाल ही में इंटरनेट आधारित CCTV कैमरों और अन्य स्मार्ट डिवाइस से जुड़े सुरक्षा मानकों को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, ताकि संभावित साइबर जोखिमों को कम किया जा सके।
डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ रहा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है। साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। इसी कारण सरकारें समय-समय पर तकनीकी उपकरणों और डिजिटल नेटवर्क से जुड़े नियमों की समीक्षा करती रहती हैं।


