भारत और जापान के रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगी। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी, जहां दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा होगी।
इस यात्रा का सबसे बड़ा फोकस सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और जापान ऐसी मजबूत सप्लाई चेन विकसित करना चाहते हैं, जिससे भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट का असर कम से कम पड़े। दोनों देश हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी निवेश को भी नई गति देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
शिखर सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देश लंबे समय से स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करते रहे हैं और इस साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
दौरे के दौरान भारत-जापान बिजनेस फोरम का आयोजन भी होगा। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। निवेश, औद्योगिक सहयोग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और नई परियोजनाओं पर चर्चा के साथ कई संभावित निवेश प्रस्तावों पर भी बातचीत हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, बैटरी निर्माण, ग्रीन अमोनिया और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ओडिशा में बड़े ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की संभावना है।
पूर्वोत्तर भारत और बंगाल की खाड़ी को जोड़ने वाली इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन विकसित करने पर भी दोनों देशों का विशेष ध्यान रहेगा। इस पहल से क्षेत्रीय व्यापार, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
भारत और जापान ने वर्ष 2014 में अपने संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, बुनियादी ढांचे, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में लगातार सहयोग बढ़ा है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दशक के लिए साझा विकास और रणनीतिक सहयोग का रोडमैप तैयार किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक मजबूती को नई दिशा दे सकता है।
इस यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। यदि प्रस्तावित समझौते और निवेश योजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो भारत-जापान साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी और इसका सकारात्मक असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था, उद्योग और तकनीकी विकास पर भी देखने को मिल सकता है।


