महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन उससे पहले आने वाला चरण पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) भी कई शारीरिक और मानसिक बदलाव लेकर आता है। इस दौरान शरीर में हार्मोनल परिवर्तन शुरू हो जाते हैं, जिसके कारण पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं और कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। आमतौर पर यह प्रक्रिया 40 से 50 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होती है, लेकिन कुछ महिलाओं में इसके शुरुआती संकेत 40 वर्ष से पहले भी दिखाई दे सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 40 वर्ष से पहले पेरिमेनोपॉज के लक्षण दिखाई देना असामान्य जरूर है, लेकिन यह असंभव नहीं है। कई महिलाओं में 35 से 40 वर्ष की उम्र के बीच ही हार्मोनल बदलाव शुरू हो सकते हैं। वहीं यदि 40 वर्ष से पहले मासिक धर्म पूरी तरह बंद हो जाए, तो इसे प्रीमैच्योर मेनोपॉज या प्राइमरी ओवेरियन इंसफिशिएंसी (Primary Ovarian Insufficiency) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
1. पीरियड्स का अनियमित होना
पेरिमेनोपॉज का सबसे सामान्य संकेत मासिक धर्म के पैटर्न में बदलाव है। इस दौरान कभी पीरियड्स समय से पहले आ सकते हैं, तो कभी कई सप्ताह या महीनों तक नहीं आते। कई महिलाओं को सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होती है, जबकि कुछ मामलों में केवल स्पॉटिंग भी देखने को मिल सकती है।
2. मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन
हार्मोनल बदलाव का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। एस्ट्रोजन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। यदि ये बदलाव लंबे समय तक बने रहें और दैनिक जीवन को प्रभावित करें, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित होता है।
3. नींद की समस्या और रात में पसीना आना
पेरिमेनोपॉज के दौरान कई महिलाओं को रात में बार-बार नींद खुलना, अधिक पसीना आना या हॉट फ्लैशेज की समस्या हो सकती है। अच्छी नींद न मिलने से अगले दिन थकान और एकाग्रता में कमी महसूस हो सकती है।
4. लगातार थकान और ऊर्जा की कमी
यदि पर्याप्त आराम करने के बाद भी शरीर में कमजोरी और थकान बनी रहती है, तो यह भी पेरिमेनोपॉज का एक संकेत हो सकता है। हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर की ऊर्जा प्रभावित होती है, जिससे दैनिक कार्यों में भी सुस्ती महसूस हो सकती है।
5. शरीर में अन्य बदलाव
कुछ महिलाओं में इस दौरान सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, वजन में बदलाव, त्वचा का रूखापन और यौन इच्छा में कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि सभी महिलाओं में एक जैसे लक्षण नहीं होते और उनकी तीव्रता भी अलग-अलग हो सकती है।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से कम है और लगातार पीरियड्स अनियमित हो रहे हैं, लंबे समय तक मासिक धर्म नहीं आ रहा, अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही है या लगातार थकान, मूड स्विंग्स और नींद की समस्या बनी हुई है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। समय पर जांच और सही उपचार से इन लक्षणों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
संतुलित जीवनशैली भी है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव कम करने की कोशिश और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाने से पेरिमेनोपॉज के दौरान होने वाली कई समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर विकल्प है।


