इजराइल और भारत के बीच रणनीतिक संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बदलते वैश्विक हालात में नए साझेदारों और नए गठबंधनों को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि इजराइल भारत जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ अपने संबंधों को और आगे बढ़ाना चाहता है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में इजराइल को अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ-साथ नए रणनीतिक साझेदारों के साथ भी रिश्ते मजबूत करने होंगे। उन्होंने भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है।
भारत और इजराइल के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय दौरे और समझौते भी इस साझेदारी को नई दिशा देते रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत और इजराइल के संबंध रणनीतिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। दोनों देश रक्षा तकनीक, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक कृषि जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं।
हाल के समय में अमेरिका, ईरान और पश्चिम एशिया से जुड़े कई मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग देशों के अपने-अपने दृष्टिकोण सामने आए हैं। ऐसे माहौल में इजराइल अन्य प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को और व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि नेतन्याहू ने भारत को अमेरिका का विकल्प या “सबसे बड़ा सहयोगी” बताया है। ऐसे दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। आधिकारिक रूप से इतना स्पष्ट है कि इजराइल भारत के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
भारत और इजराइल के रिश्ते आज रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर व्यापार, निवेश, शिक्षा, नवाचार और तकनीकी साझेदारी तक पहुंच चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच यह सहयोग और मजबूत हो सकता है।


