कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के बाद भारत सरकार ने सोमवार को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक दूरदर्शी नेता और भारत का सच्चा मित्र बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। शेख हमद के नेतृत्व में कतर ने आर्थिक, कूटनीतिक और वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति की और एक छोटे खाड़ी देश से विश्व मंच पर प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाई।
शेख हमद ने वर्ष 1995 से 2013 तक कतर पर शासन किया। उन्होंने 1995 में बिना किसी रक्तपात के सत्ता संभाली और लगभग 18 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया। उनके शासनकाल में कतर ने प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार का प्रभावी उपयोग करते हुए खुद को दुनिया के प्रमुख लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यातकों में शामिल किया। इससे देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली और कतर वैश्विक निवेश तथा ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख ताकत बनकर उभरा।
उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में अल जज़ीरा मीडिया नेटवर्क की स्थापना और विस्तार शामिल है। इस मीडिया नेटवर्क ने कतर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई और वैश्विक मीडिया जगत में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। इसके अलावा कतर एयरवेज के विस्तार और देश के बुनियादी ढांचे के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शेख हमद के नेतृत्व में ही कतर ने 2022 फीफा विश्व कप की मेजबानी का अधिकार हासिल किया। यह पहली बार था जब फुटबॉल का सबसे बड़ा टूर्नामेंट मध्य पूर्व के किसी देश में आयोजित हुआ। इस आयोजन ने कतर को वैश्विक खेल मानचित्र पर भी मजबूत पहचान दिलाई।
वर्ष 2013 में शेख हमद ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे और वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी। खाड़ी देशों के वंशानुगत शासन में इस तरह शांतिपूर्ण और स्वैच्छिक सत्ता हस्तांतरण को एक दुर्लभ घटना माना जाता है।
कतर की सर्वोच्च सरकारी संस्था अमीरी दीवान ने उनके निधन की आधिकारिक घोषणा करते हुए देश के विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ाने में उनके योगदान को याद किया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी उन्हें आधुनिक कतर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला नेता बताया।
भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में भी शेख हमद का अहम योगदान माना जाता है। यही वजह है कि भारत सरकार ने उनके सम्मान में राष्ट्रीय शोक की घोषणा की और भारतीय नेतृत्व ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।


