भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत भले ही भारी गिरावट के साथ हुई, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बाजार ने शानदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला, लेकिन बाद में निवेशकों की खरीदारी के चलते बाजार ने मजबूत रिकवरी दर्ज की। इससे निवेशकों का भरोसा एक बार फिर लौटता नजर आया।
कारोबार के शुरुआती दौर में बीएसई सेंसेक्स लगभग 614 अंकों तक टूटकर 77,001 के करीब पहुंच गया था। वहीं एनएसई निफ्टी भी करीब 173 अंक गिरकर 24,038 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि कुछ ही समय बाद बाजार में माहौल बदलने लगा और मजबूत कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से दोनों प्रमुख सूचकांक तेजी से संभल गए।
सुबह करीब 11:15 बजे तक सेंसेक्स अपनी शुरुआती गिरावट से लगभग 300 अंकों की रिकवरी कर चुका था। इसी दौरान निफ्टी भी 24,100 अंक के ऊपर लौट आया। हालांकि दोनों सूचकांक अब भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, लेकिन शुरुआती कमजोरी की तुलना में स्थिति काफी बेहतर दिखाई दी।
विश्लेषकों का मानना है कि इस रिकवरी की सबसे बड़ी वजह वैल्यू बाइंग रही। जब बाजार में अच्छी कंपनियों के शेयर कम कीमत पर उपलब्ध होने लगे, तो कई निवेशकों ने इसे खरीदारी का अच्छा अवसर माना। इसी वजह से बाजार को निचले स्तरों से मजबूत सहारा मिला।
मंगलवार का दिन बाजार के लिए इसलिए भी अहम रहा क्योंकि इस दिन साप्ताहिक फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) एक्सपायरी थी। एक्सपायरी वाले दिनों में आमतौर पर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, क्योंकि ट्रेडर्स पुराने सौदों को बंद करते हैं या नए कॉन्ट्रैक्ट में अपनी पोजिशन आगे बढ़ाते हैं। यही कारण रहा कि पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में तेज हलचल बनी रही।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार फिलहाल निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं 24,300 का स्तर भी अहम प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर को मजबूती से पार करता है, तो आगे 24,500 के आसपास तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
दूसरी ओर यदि बाजार दोबारा कमजोर होता है और निफ्टी 24,000 के नीचे फिसलता है, तो फिर इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है। इसलिए आने वाले कुछ कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
फिलहाल घरेलू निवेशकों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों की चाल और आर्थिक आंकड़ों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। इन सभी कारकों का असर आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उतार-चढ़ाव वाले माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और किसी भी निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता तथा वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर, मंगलवार का कारोबार यह संकेत देता है कि शुरुआती दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में खरीदारी की ताकत अभी भी मौजूद है। अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सत्र और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


