होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने साफ कर दिया है कि रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का फैसला अमेरिका के रुख पर निर्भर करेगा। IRGC ने यह भी कहा है कि इस मुद्दे का ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत से कोई सीधा संबंध नहीं है।
IRGC ने अमेरिका के सामने रखी शर्त
ईरान की फार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, IRGC के प्रवक्ता सरदार हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना अमेरिका द्वारा ईरान की शर्तों को स्वीकार करने पर निर्भर है।
उनके इस बयान से साफ संकेत मिल रहा है कि तेहरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर अपने रुख में फिलहाल नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। IRGC ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज को खोलने के मुद्दे को ईरान और ओमान के बीच होने वाली बातचीत से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आया बयान
IRGC का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति का दावा किया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है और जल्द किसी समझौते की उम्मीद है।
अगर दोनों देशों के बीच कोई सहमति बनती है और जलडमरूमध्य से सामान्य व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू होती है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।
होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी के देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी समुद्री रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।
ऐसे में अगर इस रास्ते पर लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहती है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों से लेकर समुद्री माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिका की भी बड़ी शर्त
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना किसी रुकावट के कमर्शियल शिपिंग बहाल करने को लेकर समझौता होता है, तो अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाने की दिशा में कदम उठा सकता है।
हालांकि, अमेरिका ने यह भी साफ किया है कि उसके आगे के कदम ईरान की ओर से अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने और किए गए वादों को निभाने पर निर्भर करेंगे।
यानी दोनों पक्षों के बीच बातचीत में एक संभावित रास्ता जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन अंतिम समझौते के लिए अभी कई शर्तों पर सहमति बनना बाकी है।
ट्रंप ने भी जताई उम्मीद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान से जुड़े विवाद को लेकर उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि यह विवाद बहुत जल्द खत्म हो सकता है।
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी बातचीत को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। साथ ही उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अपने रुख को दोहराया।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच किन शर्तों पर सहमति बनती है।
एक तरफ अमेरिका और ओमान की ओर से बातचीत में प्रगति के संकेत दिए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ IRGC ने स्पष्ट कर दिया है कि जलडमरूमध्य खोलने का फैसला ईरान की शर्तों से जुड़ा है।
अगर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाता है, तो इससे न सिर्फ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सकती है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और पूरे खाड़ी क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन फिलहाल गेंद दोनों पक्षों के पाले में है और आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत ही तय करेगी कि होर्मुज का रास्ता कब और किन शर्तों पर खुलेगा।


