रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब चार साल से ज्यादा लंबा हो चुका है, लेकिन संघर्ष खत्म होने के बजाय लगातार नए मोड़ लेता नजर आ रहा है। इसी बीच उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आशंका जताई है कि उत्तर कोरिया रूस के समर्थन में बड़ी संख्या में सैनिक भेज सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह संख्या 30 हजार से लेकर 50 हजार तक हो सकती है। हालांकि, 50 हजार सैनिकों की तैनाती की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसे फिलहाल यूक्रेन की ओर से सामने रखे गए आकलन के तौर पर ही देखा जा रहा है।
रूस और उत्तर कोरिया के बीच पिछले कुछ समय से सैन्य संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। उत्तर कोरिया पर रूस को सैन्य सहायता और हथियार उपलब्ध कराने के आरोप लगते रहे हैं। इसके साथ ही उत्तर कोरियाई सैनिकों की रूस के समर्थन में तैनाती की बात भी पहले सामने आ चुकी है। अब अगर अतिरिक्त सैनिकों की बड़ी संख्या में तैनाती होती है तो इससे युद्ध की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
यूक्रेन के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस को अतिरिक्त सैनिक मिलने से उसके पास युद्ध के मोर्चे पर मानव संसाधन बढ़ सकता है। लंबे समय से चल रहे युद्ध में सैनिकों की संख्या और सैन्य संसाधन दोनों ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उत्तर कोरिया की ओर से संभावित अतिरिक्त सैन्य समर्थन यूक्रेन के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।
किम जोंग उन और पुतिन के बीच रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया है और सैन्य सहयोग भी बढ़ा है। उत्तर कोरिया के सैनिकों की रूस में पहले की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि दोनों देशों का सहयोग केवल राजनीतिक समर्थन या हथियारों तक सीमित नहीं है।
दूसरी तरफ यूक्रेन लगातार पश्चिमी देशों से सैन्य सहायता बढ़ाने की मांग कर रहा है। जेलेंस्की का मानना है कि रूस को बाहरी देशों से मिलने वाला सैन्य समर्थन युद्ध की दिशा को प्रभावित कर सकता है। उत्तर कोरिया की संभावित भूमिका ने यूक्रेन की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
इस घटनाक्रम का असर यूरोप के साथ-साथ एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ सकता है। अगर रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य सहयोग और ज्यादा बढ़ता है तो अमेरिका, दक्षिण कोरिया और अन्य पश्चिमी देशों की रणनीति पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। खासतौर पर दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों को लेकर पहले से ही बेहद सतर्क रहता है।
हालांकि, 50 हजार सैनिकों की संख्या को लेकर अभी सावधानी बरतना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में यह संख्या संभावित तैनाती के आकलन के रूप में सामने आई है। उत्तर कोरिया ने इस संख्या में सैनिक भेजने की कोई स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि वास्तव में 50 हजार उत्तर कोरियाई सैनिक युद्ध के मैदान में उतरने वाले हैं।
फिर भी अगर इतनी बड़ी संख्या में उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के समर्थन में पहुंचते हैं, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है। इससे रूस को अतिरिक्त सैन्य क्षमता मिल सकती है और यूक्रेन पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य सहयोग किस स्तर तक पहुंचता है और क्या उत्तर कोरिया वास्तव में बड़ी संख्या में अपने सैनिकों को रूस के समर्थन में भेजता है।


