दिल्ली के जसोला इलाके से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां खुले नाले में गिरे 15 साल के बच्चे की चार दिन बाद लाश बरामद हुई। जिस बेटे को बचाने की उम्मीद में पिता दिन-रात नाले के आसपास तलाश करता रहा, आखिरकार मंगलवार को उसकी तलाश का दुखद अंत हो गया। बच्चे की पहचान 15 वर्षीय मिथुन के रूप में हुई है।
बताया जा रहा है कि मिथुन 22 अगस्त को पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान वह अचानक खुले नाले में जा गिरा। नाले में उस वक्त पानी का बहाव तेज था, जिसकी वजह से बच्चा पानी के साथ बह गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और बच्चे की तलाश शुरू कर दी गई।
बेटे के नाले में गिरने की खबर सुनकर पिता की हालत बेहद खराब हो गई। लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। पिता लगातार नाले के आसपास अपने बेटे को तलाश करते रहे। कचरे के ढेर और नाले के आसपास जमा गंदगी को हटाकर वह यह देखने की कोशिश करते रहे कि कहीं उनका बेटा वहां फंसा तो नहीं है।
दूसरी तरफ बच्चे की तलाश के लिए बचाव दलों को भी लगाया गया। तेज बहाव और नाले में जमा कचरे की वजह से रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर नाले की स्थिति ऐसी थी कि बचावकर्मियों को बेहद सावधानी के साथ सर्च ऑपरेशन चलाना पड़ा।
घटना के बाद लगातार कई घंटों तक तलाश अभियान चलाया गया। लेकिन पानी का तेज बहाव और नाले की गहराई के कारण बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। परिवार के लिए हर गुजरता घंटा उम्मीद और डर के बीच बीत रहा था। पिता लगातार अपने बेटे के मिलने की आस लगाए बैठे थे।
चार दिन तक तलाश जारी रही। परिवार और बचाव दलों ने नाले के आसपास कई जगहों पर खोजबीन की। कचरे और पानी के बीच बच्चे को तलाशना आसान नहीं था। पिता भी बचाव अभियान के दौरान अपने स्तर पर बेटे को खोजने की कोशिश करते रहे।
आखिरकार मंगलवार को बचाव दल को सफलता मिली और नाले से मिथुन का शव बरामद कर लिया गया। जिस बच्चे की चार दिनों से तलाश की जा रही थी, उसके शव के मिलने की खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। बेटे को जिंदा देखने की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों के सामने अब उसकी लाश थी।
इस घटना ने दिल्ली में खुले नालों और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के मौसम में खुले नाले बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। खासकर बच्चों के लिए ऐसे स्थान जानलेवा खतरा बन जाते हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसे खुले नालों को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया और क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नजर इस समस्या पर जाती है?
मिथुन के साथ हुआ हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन सभी खुले नालों को लेकर चेतावनी भी है जो बारिश के दौरान और ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। पानी का स्तर बढ़ने पर नाले और सड़क के बीच का फर्क दिखाई नहीं देता और जरा सी चूक किसी की जान ले सकती है।
चार दिन तक पिता अपने बेटे को तलाशता रहा। कभी कचरा हटाता, कभी नाले के किनारे जाकर उम्मीद से देखता और कभी बचाव दल के साथ खोजबीन करता रहा। लेकिन आखिरकार जिस खबर का परिवार को डर था, वही सामने आई।
अब इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से खुले नालों को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा? क्या ऐसे स्थानों को ढकने या सुरक्षित करने की व्यवस्था होगी, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को अपने बच्चे की तलाश में इस तरह चार दिन न गुजारने पड़ें?
मिथुन की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। एक पिता चार दिनों तक अपने बेटे को खोजता रहा और आखिर में उसे अपने बच्चे का शव मिला। यह दर्द शायद किसी भी माता-पिता के लिए शब्दों में बयान करना मुश्किल है।


