भारतीय पुरुष हॉकी टीम का वर्ल्ड कप अभियान बेहद निराशाजनक तरीके से खत्म हो गया है। 51 साल बाद वर्ल्ड कप में पदक जीतने का सपना लेकर उतरी भारतीय टीम सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंच सकी। अर्जेंटीना के खिलाफ भारत को 3-5 से हार का सामना करना पड़ा और इसके साथ ही टीम की सेमीफाइनल की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। इस हार के बाद पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों ने टीम के प्रदर्शन के साथ-साथ चयन प्रक्रिया और युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं दिए जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। विपक्षी टीम ने शुरुआती मिनटों में ही भारत पर दबाव बना दिया और भारतीय डिफेंस को लगातार परेशान किया। भारत ने मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद टीम पर दबाव लगातार बढ़ता गया। भारतीय खिलाड़ियों ने गोल करने के मौके जरूर बनाए, लेकिन उन्हें गोल में बदलने में नाकामी टीम को भारी पड़ी।
इस मुकाबले ने भारतीय टीम की उन कमजोरियों को भी सामने ला दिया, जिन पर पिछले कुछ समय से सवाल उठते रहे हैं। डिफेंस में तालमेल की कमी, शुरुआत में दबाव में आ जाना और पेनल्टी कॉर्नर जैसे महत्वपूर्ण मौकों का फायदा नहीं उठा पाना भारत की बड़ी परेशानियां रहीं। कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर भी टीम काफी निर्भर रही, लेकिन इस मुकाबले में भारत को उनकी तरफ से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सका।
अब पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का कहना है कि समस्या केवल अर्जेंटीना के खिलाफ हार तक सीमित नहीं है। भारतीय हॉकी में लंबे समय से एक ही कोर ग्रुप पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि अगर कुछ सीनियर खिलाड़ी आने वाले समय में टीम से बाहर होते हैं तो उनकी जगह लेने के लिए तैयार खिलाड़ियों की दूसरी पंक्ति कहां है।
पूर्व भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भी युवा खिलाड़ियों को समय रहते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका देने की जरूरत पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सीनियर खिलाड़ियों के बाद टीम में जगह कौन लेगा, इसके लिए अभी से तैयारी करनी होगी। आने वाले बड़े टूर्नामेंटों को देखते हुए युवा खिलाड़ियों को पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय अनुभव देना बेहद जरूरी है।
पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह ने भी टीम चयन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका मानना है कि कुछ जूनियर खिलाड़ियों को सही समय पर मौका मिलना चाहिए था। सिर्फ अनुभव के आधार पर टीम तैयार करने से भविष्य की मजबूत टीम नहीं बनाई जा सकती। बड़े टूर्नामेंटों के लिए ऐसी टीम तैयार करनी होगी जिसमें अनुभव और युवा जोश दोनों का संतुलन हो।
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता कप्तान वासुदेवन भास्करन ने भी भारतीय टीम की फॉरवर्ड लाइन और मिडफील्ड के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि भारतीय टीम के हमलों में निरंतरता की कमी रही और कई मौकों पर टीम ने विपक्षी गोल पर पर्याप्त दबाव नहीं बनाया। इसके अलावा मिडफील्ड में जगह छोड़ने और गेंद पर नियंत्रण खोने का खामियाजा भी भारत को भुगतना पड़ा।
दिग्गज खिलाड़ी परगट सिंह ने भारतीय हॉकी के घरेलू ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मजबूत घरेलू प्रतियोगिताओं के बिना लगातार नई प्रतिभाओं को तैयार करना मुश्किल है। भारत में पहले कई प्रतिष्ठित घरेलू हॉकी टूर्नामेंट हुआ करते थे, जहां से युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता था। अब जरूरत है कि जमीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय टीम तक खिलाड़ियों को विकसित करने की मजबूत व्यवस्था तैयार की जाए।
भारतीय हॉकी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ इस वर्ल्ड कप की हार नहीं है। अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों को देखते हुए टीम में बदलाव और नई प्रतिभाओं को शामिल करना जरूरी हो सकता है। अगर युवा खिलाड़ियों को अभी मौका नहीं दिया गया तो बाद में उन्हें बड़े टूर्नामेंटों में सीधे उतारना मुश्किल होगा।
भारत की समस्या यह भी रही है कि एशियाई स्तर पर सफलता मिलने के बाद टीम को कई बार लगता है कि तैयारी पर्याप्त है। लेकिन यूरोप और दक्षिण अमेरिका की मजबूत टीमों के खिलाफ मुकाबले में अलग स्तर की फिटनेस, रणनीति और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। भारतीय टीम को इसी अंतर को खत्म करने की जरूरत है।
अब सवाल यह है कि क्या भारतीय हॉकी में बड़े बदलाव की शुरुआत होगी? क्या चयनकर्ताओं और कोचिंग स्टाफ की रणनीति बदलेगी? क्या जूनियर खिलाड़ियों को ज्यादा मौके मिलेंगे? और क्या अगले बड़े टूर्नामेंट से पहले एक नई और मजबूत टीम तैयार की जाएगी?
भारतीय हॉकी के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उस प्रतिभा को सही समय पर सही मंच देने की जरूरत है। वर्ल्ड कप की यह हार भारतीय हॉकी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अगर भारत को भविष्य में वर्ल्ड कप और ओलंपिक में पदक जीतना है तो केवल पुराने रिकॉर्ड और अनुभवी खिलाड़ियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। टीम चयन से लेकर घरेलू ढांचे और युवा खिलाड़ियों की तैयारी तक हर स्तर पर गंभीर बदलाव की जरूरत होगी।


