नेपाल इस वक्त भीषण अचानक आई बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। रासुवा और नुवाकोट में आई भयानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस मुश्किल वक्त में नेपाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत-बचाव अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने की है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुधवार को संसद में सरकार की कार्रवाई को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में सरकार पूरी हिम्मत और संकल्प के साथ देश के लोगों के साथ खड़ी है।
प्रधानमंत्री शाह के मुताबिक, यह भयावह घटना सुबह करीब 8 बजकर 30 मिनट पर हुई। जैसे ही सरकार को हादसे की जानकारी मिली, संबंधित टीमों को तुरंत अलर्ट कर दिया गया।
शाह ने बताया कि सुबह करीब 9 बजकर 15 मिनट पर एक आपात बैठक बुलाई गई। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान को लेकर तेजी से फैसले लिए गए।
सरकार ने सेना के हेलीकॉप्टरों को भी स्टैंडबाय पर रखने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत प्रभावित इलाकों में भेजा जा सके।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सुबह करीब 10 बजकर 30 मिनट तक आपातकालीन बचाव दल तैनाती के लिए तैयार हो चुके थे। सरकार की प्राथमिकता बिल्कुल स्पष्ट थी—जितनी जल्दी हो सके लोगों की जान बचाई जाए।
बालेन शाह ने संसद में कहा कि प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चलाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों को निर्देश दिए गए थे। हालांकि, पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां राहत एवं बचाव अभियान के लिए बड़ी मुश्किल पैदा कर सकती हैं।
उन्होंने बताया कि दोपहर करीब 1 बजे सरकार स्थानीय सांसद और विधायक से संपर्क करने में सफल रही। स्थानीय प्रतिनिधियों से संपर्क होने के बाद जमीनी स्थिति की जानकारी हासिल करने और राहत अभियान को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिली।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि नेपाल सरकार ने घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन, आपातकालीन टीमों और सेना को सक्रिय करने की कोशिश की। लेकिन अचानक आई बाढ़ और पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों ने बचाव अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस मुश्किल समय में देशवासियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार लोगों के साथ खड़ी है और संकट से लड़ने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक राहत कितनी तेजी से पहुंचाई जा सकती है और कितने लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सकता है।
नेपाल में आई इस आपदा ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, मौसम की मार और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान राहत और बचाव अभियान पर है। सेना के हेलीकॉप्टर, आपातकालीन टीमें और स्थानीय प्रशासन प्रभावित इलाकों में लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
संकट की इस घड़ी में नेपाल के सामने चुनौती बहुत बड़ी है, लेकिन प्रधानमंत्री बालेन शाह का कहना है कि सरकार हिम्मत और संकल्प के साथ इस मुश्किल वक्त का सामना करेगी और लोगों की जान बचाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।


