भारतीय शतरंज के युवा सितारे आर प्रज्ञानानंद ने एक बार फिर पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है। ग्रैंड चेस टूर फाइनल में फैबियानो करूआना को 15-13 से हराकर प्रज्ञानानंद ने प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ वह इस प्रतियोगिता को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी और कुल सातवें चैंपियन बन गए। इतना ही नहीं, इस ऐतिहासिक जीत के लिए उन्हें दो लाख डॉलर की पुरस्कार राशि भी मिली।
लेकिन प्रज्ञानानंद की इस जीत की सबसे खास कहानी सिर्फ ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। उनकी सफलता इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि उन्होंने अपनी उस कमजोरी को ही अपनी ताकत में बदल दिया, जिसे करीब एक साल पहले उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया था। तेज और बहुत तेज गति वाले शतरंज यानी Speed Chess में प्रज्ञानानंद को दबाव में लाने की रणनीति बनाई जाती थी, लेकिन इस बार उन्होंने उसी प्रारूप में शानदार प्रदर्शन करके आलोचकों को जवाब दे दिया।
करीब एक साल पहले ग्रैंड चेस टूर फाइनल में तीसरे स्थान के मुकाबले में दिग्गज खिलाड़ी लेवोन अरोनियन ने प्रज्ञानानंद को मात दी थी। उस मुकाबले के दौरान अरोनियन ने भारतीय खिलाड़ी के खेल को बेहद करीब से देखा था। उन्हें लगा था कि तेज और बहुत तेज शतरंज में प्रज्ञानानंद पर दबाव बनाया जा सकता है। यानी स्पीड चेस को उनके खेल का कमजोर पक्ष माना जा रहा था।
लेकिन इसके बाद प्रज्ञानानंद ने अपनी रणनीति पर काम किया और नतीजे धीरे-धीरे सामने आने लगे। एक साल के भीतर उनके खेल में ऐसा बदलाव दिखाई दिया कि वही तेज प्रारूप, जो कभी उनकी कमजोरी माना जाता था, ग्रैंड चेस टूर फाइनल में उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
फाइनल में प्रज्ञानानंद ने दोनों तेज मुकाबले जीत लिए। इसके बाद चार मुकाबलों वाले बहुत तेज चरण में भी उन्होंने मुकाबले को 4-4 की बराबरी पर खत्म किया। यही प्रदर्शन अंत में निर्णायक साबित हुआ और प्रज्ञानानंद ने करूआना को 15-13 से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया।
उनकी इस शानदार वापसी की दिग्गज खिलाड़ी लेवोन अरोनियन ने भी तारीफ की। अरोनियन ने माना कि पिछले एक साल में प्रज्ञानानंद ने तेज और बहुत तेज खेल में काफी सुधार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई खिलाड़ी अपनी कमजोरी को पहचानकर उसे दूर करने के लिए मेहनत करता है, तो उसकी तारीफ होनी चाहिए। अरोनियन ने प्रज्ञानानंद को संघर्ष करने वाला और पसंद आने वाला खिलाड़ी भी बताया।
प्रज्ञानानंद की सफलता पर भारतीय शतरंज के महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। आनंद ने हाल के प्रदर्शन के आधार पर प्रज्ञानानंद की जमकर तारीफ की है और उन्हें मौजूदा समय का दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी तक बताया। हालांकि, यह आधिकारिक विश्व रैंकिंग नहीं बल्कि उनके हालिया प्रदर्शन को लेकर आनंद की राय थी।
आनंद ने प्रज्ञानानंद की वापसी की क्षमता का एक और उदाहरण दिया। नॉर्वे शतरंज प्रतियोगिता में एक समय प्रज्ञानानंद सबसे निचले स्थानों में थे और उनके पास केवल चार मुकाबले बचे थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार चार जीत दर्ज करके पूरा समीकरण बदल दिया। इसी तरह ग्रैंड चेस टूर में भी उन्होंने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन किया और निर्णायक चरण में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
दरअसल, प्रज्ञानानंद की सबसे बड़ी ताकत अब सिर्फ उनकी शतरंज की तकनीक नहीं, बल्कि दबाव में खुद को संभालने और मुकाबले की दिशा बदलने की क्षमता बनती जा रही है। किसी बड़े टूर्नामेंट के अंतिम चरण में पिछड़ने के बाद लगातार जीत हासिल करना आसान नहीं होता। लेकिन प्रज्ञानानंद बार-बार यह साबित कर रहे हैं कि मुश्किल स्थिति में उनका खेल और ज्यादा मजबूत हो जाता है।
इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस कमजोरी को कभी उनके खिलाफ रणनीति बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था, उसी क्षेत्र में उन्होंने सबसे ज्यादा सुधार किया। एक साल पहले जहां स्पीड चेस में उन्हें दबाव में लाने की बात कही जा रही थी, वहीं अब उसी तेज प्रारूप में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को मात देकर इतिहास रच दिया।
ग्रैंड चेस टूर फाइनल की यह जीत भारतीय शतरंज के लिए भी बेहद खास है। प्रज्ञानानंद ने न सिर्फ एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि लगातार मेहनत, अपनी कमियों की पहचान और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता किसी भी खिलाड़ी को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती है। जिस अंदाज में उन्होंने यह खिताब जीता है, उसे देखते हुए आने वाले वर्षों में प्रज्ञानानंद दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।


