उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट से सामने आए एक कथित अमानवीय वीडियो ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। वायरल वीडियो में जलती चिता और शव के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक हरकत किए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी अघोरी काली उर्फ नंद गिरी को गिरफ्तार कर लिया है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और इसी जांच के दौरान आरोपी की पहचान को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, अघोरी काली पहले पुरुष था और बाद में उसने अपना जेंडर ट्रांजिशन कराया। इस जानकारी के सामने आने के बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। हालांकि, आरोपी के जेंडर ट्रांजिशन से जुड़ी जानकारी को मामले की आपराधिक जांच से अलग समझना जरूरी है, क्योंकि असली सवाल श्मशान घाट में शव के साथ कथित हरकत और उससे जुड़े आरोपों का है।
बताया जा रहा है कि उज्जैन के प्रसिद्ध चक्रतीर्थ श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के दौरान जलती चिता के पास की गई कथित हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और पुलिस से कार्रवाई की मांग उठने लगी। मामला धार्मिक आस्था और अंतिम संस्कार की मर्यादा से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता और बढ़ गई। पुलिस ने वायरल वीडियो और शिकायत के आधार पर जांच शुरू की और इसके बाद अघोरी काली उर्फ नंद गिरी को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले में अघोरी अखाड़े के पीठाधीश्वर और राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़ेश्वरी अघोरी बाबा विष्णुनाथ की भूमिका भी सामने आई है। बताया गया है कि उन्होंने अघोरी काली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत में कथित तौर पर श्मशान घाट में शव के साथ की गई अमानवीय हरकत का विरोध किया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की और जांच आगे बढ़ाई।
उज्जैन का चक्रतीर्थ श्मशान घाट धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराओं के कारण देशभर में इसकी पहचान है। ऐसे स्थान पर शव के साथ कथित आपत्तिजनक व्यवहार का वीडियो सामने आने से लोगों की धार्मिक भावनाएं भी प्रभावित हुईं। यही वजह है कि पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ इस घटना को लेकर अघोरी समुदाय के भीतर से भी विरोध की आवाज सामने आई।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी अघोरी काली की पुरानी पहचान के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, अघोरी काली पहले पुरुष था और बाद में उसने जेंडर ट्रांजिशन कराया। यह जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लेकिन यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति की लैंगिक पहचान या उसका जेंडर ट्रांजिशन अपने आप में कोई अपराध नहीं है। इस मामले में जांच का केंद्र शव के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और उससे जुड़े कानूनी आरोप हैं।
अब पुलिस वायरल वीडियो, शिकायत और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना वास्तव में कब और कैसे हुई, वीडियो में दिखाई दे रही हरकत की वास्तविक प्रकृति क्या थी और इसमें आरोपी की भूमिका कितनी थी। साथ ही, पुलिस मामले से जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक और अंतिम संस्कार स्थलों पर होने वाली गतिविधियों को लेकर प्रशासन को कितनी सतर्कता बरतनी चाहिए। वायरल वीडियो के बाद जिस तरह से मामला तेजी से फैला, उससे सोशल मीडिया पर किसी घटना के सामने आने के बाद पुलिस जांच की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है और आगे की स्थिति पुलिस जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि चक्रतीर्थ श्मशान घाट में आखिर उस रात क्या हुआ था और वायरल वीडियो के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है।


