यूपी में राजस्व अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर योगी सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा के बाद राजस्व परिषद ने कामकाज में लापरवाही और लंबित वादों के निस्तारण में सुस्ती बरतने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है। कार्रवाई के तहत चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही पांचों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। सरकार के इस कदम से राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में लंबित मामलों की समीक्षा और तेज हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में राजस्व न्यायालयों में जमीन, दाखिल-खारिज, विरासत, कब्जे और अन्य राजस्व विवादों से जुड़े बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से लंबित हैं। कई मामलों के वर्षों तक निपटारा नहीं होने से आम लोगों को लगातार सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा के दौरान लंबित मामलों के निस्तारण की स्थिति पर गंभीरता दिखाई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व न्यायालयों में मामलों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। समीक्षा के बाद राजस्व परिषद ने उन अधिकारियों पर कार्रवाई की, जिनके कामकाज में लापरवाही और मामलों के धीमे निस्तारण की शिकायतें सामने आई थीं।
राजस्व परिषद की कार्रवाई के तहत चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट संकेत दिया गया है कि सिर्फ निलंबन तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। जांच के दौरान यह तय किया जाएगा कि अधिकारियों की लापरवाही किस स्तर की थी और लंबित मामलों के निस्तारण में देरी के लिए उनकी जिम्मेदारी क्या रही। इस कार्रवाई का उद्देश्य राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ाना और आम लोगों को समय पर न्याय दिलाना बताया जा रहा है।
सरकार अब राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने की तैयारी में है। अधिकारियों के कामकाज और मामलों के निस्तारण की प्रगति पर लगातार नजर रखी जाएगी। जिन अधिकारियों के स्तर पर लगातार लापरवाही या अनावश्यक देरी सामने आएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सरकार के इस रुख से राजस्व विभाग के अधिकारियों पर भी लंबित मामलों को तेजी से निपटाने का दबाव बढ़ गया है।
राजस्व विवाद सीधे आम लोगों की जमीन और संपत्ति से जुड़े होते हैं, इसलिए इन मामलों में देरी का असर परिवारों और स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक दिखाई देता है। किसी जमीन के मालिकाना हक, विरासत या अन्य राजस्व विवाद का फैसला समय पर नहीं होने से लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार का जोर अब सिर्फ नए मामलों के निस्तारण पर नहीं, बल्कि पुराने लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर खत्म करने पर है।
योगी सरकार की इस कार्रवाई को राजस्व विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार के निलंबन से यह संदेश दिया गया है कि सरकारी जिम्मेदारियों में लापरवाही और लंबित मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आगे की समीक्षा में कितने और अधिकारियों की कार्यप्रणाली जांच के दायरे में आती है और लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण की रफ्तार कितनी तेज होती है।


