7 सितंबर को देश के अलग-अलग एयरपोर्ट से विमानन क्षेत्र से जुड़ी तीन अहम घटनाएं सामने आईं, जिनमें उड़ानों की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतनी पड़ी। चेन्नई एयरपोर्ट पर मलेशिया एयरलाइंस की जेद्दा जा रही फ्लाइट को इंजन में तकनीकी खराबी के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। वहीं श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद इंडिगो की एक फ्लाइट पार्किंग पोल से टकरा गई। इसके अलावा अबू धाबी जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट को उड़ान के दौरान इंजन ऑयल तेजी से कम होने के कारण वापस कोच्चि लौटना पड़ा।
सबसे पहले बात मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH 156 की। यह विमान 7 सितंबर को जेद्दा के लिए उड़ान भर रहा था और इसमें कुल 186 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान विमान के इंजन नंबर 2 से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई। स्थिति को देखते हुए फ्लाइट को चेन्नई की ओर मोड़ने का फैसला लिया गया। विमान को चेन्नई एयरपोर्ट पर सुरक्षित तरीके से उतारा गया और एहतियात के तौर पर एयरपोर्ट पर जरूरी इमरजेंसी रिस्पॉन्स इंतजाम सक्रिय कर दिए गए थे।
विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। एयरलाइन की ओर से बताया गया कि इंजन नंबर 2 में आई तकनीकी समस्या की जांच की जा रही है। एयरलाइन की तकनीकी टीम और संबंधित विशेषज्ञ विमान का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि खराबी की सही वजह का पता लगाया जा सके। फिलहाल सबसे अहम बात यही रही कि तकनीकी समस्या के बावजूद विमान को सुरक्षित रूप से चेन्नई एयरपोर्ट पर उतार लिया गया।
दूसरी घटना श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की है, जहां लैंडिंग के बाद इंडिगो की एक फ्लाइट पार्किंग पोल से टकरा गई। अधिकारियों के मुताबिक इंडिगो की फ्लाइट 6E 225, जिसका विमान पंजीकरण VT-NOG बताया गया है, नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची थी। विमान के लैंडिंग के बाद पार्किंग की प्रक्रिया के दौरान यह एक पोल से टकरा गया। घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए गए हैं।
इस घटना के बाद विमान और एयरपोर्ट पर मौजूद संबंधित व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का मकसद यह पता लगाना है कि आखिर पार्किंग के दौरान विमान पोल से कैसे टकराया और इसके पीछे किसी तकनीकी या मानवीय कारण की भूमिका थी या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
तीसरी घटना एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 415 से जुड़ी है। यह विमान कोच्चि से अबू धाबी के लिए उड़ान भर रहा था। उड़ान के दौरान क्रू को इंजन नंबर 1 में ऑयल की मात्रा तेजी से कम होती हुई दिखाई दी। उस समय विमान अपनी यात्रा के करीब 50 मिनट पूरे कर चुका था और लगभग 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। स्थिति को देखते हुए पायलटों ने जोखिम का आकलन किया और विमान को वापस कोच्चि लाने का फैसला किया।
क्रू ने स्थिति से निपटने के लिए FORDEC नाम की व्यवस्थित निर्णय लेने की प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया के जरिए पायलट किसी आपात या असामान्य स्थिति में तथ्यों और विकल्पों का आकलन करते हैं और उसके बाद सबसे सुरक्षित कदम उठाने का निर्णय लेते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत विमान को वापस कोच्चि लाया गया।
इन तीनों घटनाओं में एक बात समान रही कि अलग-अलग परिस्थितियों में पायलटों और एयरपोर्ट टीमों ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी। मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट को तकनीकी खराबी के बाद चेन्नई डायवर्ट किया गया, इंडिगो की फ्लाइट के पोल से टकराने के मामले में जांच शुरू की गई और एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट को इंजन ऑयल की समस्या के बाद वापस कोच्चि लाया गया। अब संबंधित तकनीकी और जांच टीमें इन घटनाओं के कारणों का पता लगाने में जुटी हैं।


