नीम करौली बाबा का नाम आते ही सबसे पहले उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम का ख्याल आता है। नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल बन चुका है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई मशहूर हस्तियां भी कैंची धाम आ चुकी हैं। हालांकि, नीम करौली बाबा का आध्यात्मिक प्रभाव सिर्फ कैंची धाम तक सीमित नहीं था। देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके जीवन, उनकी साधना और हनुमान भक्ति से जुड़ी कई जगहें आज भी मौजूद हैं।
नीम करौली बाबा 20वीं सदी के प्रसिद्ध संतों में गिने जाते हैं। भक्त उन्हें हनुमान जी का परम भक्त और कई लोग हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। उनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता और भक्ति की ओर था। आगे चलकर उन्होंने अपना जीवन आध्यात्मिक साधना और सेवा को समर्पित कर दिया। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
नीम करौली बाबा से जुड़ा सबसे प्रसिद्ध किस्सा ट्रेन से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि एक बार अंग्रेजों के दौर में उन्हें नीम करौली स्टेशन के पास ट्रेन से उतार दिया गया था। इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। काफी कोशिशों के बाद भी ट्रेन नहीं चली। मान्यता है कि बाबा को वापस ट्रेन में बैठाने के बाद ही ट्रेन आगे बढ़ी। इसी घटना के बाद उन्हें नीम करौली बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली। हालांकि इस घटना से जुड़े विवरण मुख्य रूप से भक्तों की मान्यताओं और मौखिक परंपराओं में मिलते हैं।
कैंची धाम बाबा का सबसे प्रसिद्ध आश्रम है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे स्थान हैं जहां उनकी हनुमान भक्ति की छाप देखने को मिलती है। इनमें नैनीताल का हनुमान गढ़ी, काकड़ीघाट आश्रम, दिल्ली का बिरला हनुमान मंदिर और वृंदावन स्थित आश्रम प्रमुख हैं।
नैनीताल का हनुमान गढ़ी मंदिर नीम करौली बाबा से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और परिसर में भगवान राम और शिव से जुड़े मंदिर भी हैं। बताया जाता है कि करीब 1950 के आसपास नीम करौली बाबा ने यहां मंदिर की स्थापना कराई थी। यह स्थान अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ खूबसूरत प्राकृतिक वातावरण और सूर्यास्त के लिए भी जाना जाता है। नैनीताल घूमने जाने वाले श्रद्धालु और पर्यटक हनुमान गढ़ी को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
हनुमान गढ़ी पहुंचना भी काफी आसान है। यह नैनीताल में ही स्थित है और शहर से बस, कैब या शेयरिंग टैक्सी के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। काठगोदाम से नैनीताल की दूरी करीब 32 किलोमीटर है।
दूसरा महत्वपूर्ण स्थान है काकड़ीघाट आश्रम। यह उत्तराखंड में भवाली से अल्मोड़ा जाने वाले मार्ग पर स्थित है। यह स्थान भी नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। यहां बाबा ने हनुमान मंदिर की स्थापना कराई थी। बाद में सिद्धि मां ने मंदिर से जुड़े कार्यों को पूरा कराया और पुराने शिव मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया। शांत वातावरण के कारण यह जगह आध्यात्मिक यात्रा के लिए खास मानी जाती है।
काकड़ीघाट आश्रम पहुंचने के लिए काठगोदाम से सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां से आश्रम की दूरी करीब 65 किलोमीटर बताई जाती है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन के बाहर से अल्मोड़ा और रानीखेत की तरफ जाने वाली बस या टैक्सी लेकर काकड़ीघाट पहुंचा जा सकता है।
तीसरा महत्वपूर्ण स्थान दिल्ली का बिरला हनुमान मंदिर है। यह यमुना के किनारे और दिल्ली के पुराने इलाके से जुड़े क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक है। नीम करौली बाबा का इस स्थान से भी जुड़ाव बताया जाता है। मान्यता के अनुसार बाबा ने यहां हनुमान मंदिर की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दिल्ली आने वाले श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन कर सकते हैं।
बिरला हनुमान मंदिर पहुंचने के लिए मेट्रो, बस, ऑटो, ई-रिक्शा या कैब का इस्तेमाल किया जा सकता है। लाल किला और चांदनी चौक जैसे प्रमुख इलाकों से यहां सड़क मार्ग के जरिए पहुंचा जा सकता है। दिल्ली में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह नीम करौली बाबा से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।
चौथा स्थान है वृंदावन आश्रम। मथुरा-वृंदावन जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह जगह भी खास है। वृंदावन में नीम करौली बाबा का आश्रम और हनुमान मंदिर मौजूद है। बताया जाता है कि यहां पहला मंदिर 1967 में बनाया गया था। आश्रम परिसर में बाबा का समाधि मंदिर भी है, जहां भक्त श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।
वृंदावन स्थित आश्रम मथुरा रोड से कुछ दूरी पर परिक्रमा मार्ग के आसपास स्थित है। यहां पहुंचने के लिए टैक्सी, रिक्शा या ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया जा सकता है। वृंदावन की धार्मिक यात्रा के दौरान नीम करौली बाबा के भक्त इस आश्रम को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
नीम करौली बाबा से जुड़े इन स्थानों की खासियत सिर्फ मंदिर या आश्रम होना नहीं है, बल्कि इनसे जुड़ी उनकी भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक परंपरा भी है। कैंची धाम भले ही आज बाबा की सबसे प्रसिद्ध पहचान बन चुका है, लेकिन नैनीताल, काकड़ीघाट, दिल्ली और वृंदावन में मौजूद ये स्थान भी उनके आध्यात्मिक प्रभाव की झलक देते हैं। अगर आप नीम करौली बाबा के भक्त हैं या उनके जीवन और हनुमान भक्ति से जुड़े स्थानों को करीब से देखना चाहते हैं, तो कैंची धाम के साथ इन जगहों को भी अपनी धार्मिक यात्रा में शामिल कर सकते हैं।


