रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म कराने के लिए भारत एक बार फिर कूटनीतिक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत दोनों पक्षों के संपर्क में है और अगर युद्ध समाप्त कराने की दिशा में किसी भी तरह की मदद की जरूरत पड़ती है, तो भारत अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार रहेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार यह मानता रहा है कि यह युद्ध का दौर नहीं है। भारत का मानना है कि किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता। इसके लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाना जरूरी है।
भारत का यह रुख रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को लेकर पहले से स्पष्ट रहा है। नई दिल्ली लगातार दोनों देशों से बातचीत और संवाद के जरिए विवाद का समाधान निकालने की अपील करता रहा है। भारत का कहना है कि युद्ध से किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता और आखिरकार दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर आना ही होगा।
दरअसल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 3 सितंबर को यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने यूक्रेनी नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर की कीव यात्रा को भारत की उस कूटनीतिक कोशिश के तौर पर देखा गया, जिसके तहत वह रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए शांति का रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संबंध महत्वपूर्ण हैं। रूस के साथ भारत के लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध रहे हैं, वहीं यूक्रेन के साथ भी भारत के राजनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में भारत दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर रहा है।
भारत पहले भी कई मौकों पर कह चुका है कि किसी भी युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रूस और यूक्रेन के नेताओं से मुलाकात के दौरान शांति और संवाद का संदेश दे चुके हैं। भारत लगातार यह बात दोहराता रहा है कि दुनिया को युद्ध नहीं बल्कि शांति और सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
रणधीर जायसवाल का ताजा बयान इसी नीति को आगे बढ़ाता है। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर भारत किसी भी तरह से दोनों देशों के बीच संघर्ष को खत्म कराने में मदद कर सकता है, तो वह अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। हालांकि भारत ने यह दावा नहीं किया है कि कोई अंतिम समझौता तय हो चुका है या युद्ध जल्द समाप्त होने वाला है।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लंबे समय से जारी है और दोनों देशों के बीच कई गंभीर मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में शांति समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति और राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी होगी।
भारत की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि नई दिल्ली के रूस और पश्चिमी देशों दोनों के साथ संवाद के रास्ते खुले हुए हैं। भारत ने युद्ध के दौरान किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करने के बजाय बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता दी है। इसी वजह से भारत भविष्य में शांति प्रक्रिया में सहयोगी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
फिलहाल भारत की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि वह रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने के किसी भी गंभीर प्रयास में सहयोग करने के लिए तैयार है। लेकिन समझौता कब और किस शर्त पर होगा, यह दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की दिशा में भारत की कोशिश कितनी सफल होती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल नई दिल्ली का रुख बिल्कुल स्पष्ट है—युद्ध से समाधान नहीं निकलेगा और स्थायी शांति का रास्ता बातचीत और कूटनीति से ही होकर जाएगा।


