महाराष्ट्र की महायुति सरकार में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सख्ती के बाद मंत्रालयों में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। मुख्यमंत्री कार्यालय समेत राज्य के 40 मंत्री-कार्यालयों में काम कर रहे 550 से ज्यादा ऐसे कर्मचारियों को हटा दिया गया है, जिनकी नियुक्ति या तैनाती मानक वेरिफिकेशन प्रक्रिया के तहत नहीं हुई थी। इस कार्रवाई के बाद मंत्रालयों में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि मंत्री कार्यालयों में किसी भी कर्मचारी की तैनाती तय नियमों और प्रक्रिया के मुताबिक ही होनी चाहिए।
यह पूरी कार्रवाई 25 अगस्त 2026 को जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट यानी सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी किए गए आदेश के बाद हुई है। सरकार की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय समेत 40 मंत्री-कार्यालयों के लिए कुल 904 अस्थायी पदों को मंजूरी दी गई थी। लेकिन इनमें से सिर्फ 549 पद ही निर्धारित और मानक प्रक्रियाओं के तहत भरे गए थे। बाकी पदों पर कर्मचारियों की तैनाती को लेकर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद सरकार ने मामले की समीक्षा की और बिना उचित वेरिफिकेशन या निर्धारित प्रक्रिया के काम कर रहे कर्मचारियों को वापस उनके मूल विभागों में भेजने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों में कई ऐसे लोग शामिल थे, जो आउटसोर्सिंग, लोनिंग यानी दूसरे विभागों से अस्थायी तौर पर लिए जाने और अनौपचारिक मौखिक आदेशों के आधार पर मंत्री कार्यालयों में काम कर रहे थे। सरकार ने इस व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए ऐसे कर्मचारियों को मंत्री कार्यालयों से हटाकर उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया है। इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
दरअसल, मंत्री कार्यालयों में अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति और तैनाती लंबे समय से प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा रही है, लेकिन सरकार अब इस व्यवस्था में नियमों को लेकर ज्यादा सख्ती दिखा रही है। मुख्यमंत्री फडणवीस की ओर से भर्ती और नियुक्तियों में प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी का असर अब मंत्रालयों में भी दिखाई दे रहा है। सरकार का संदेश साफ माना जा रहा है कि किसी भी व्यक्ति को सिर्फ सिफारिश, मौखिक आदेश या अनौपचारिक व्यवस्था के जरिए मंत्री कार्यालय में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की तैनाती बिना पूरी प्रक्रिया के कैसे होती रही। 904 स्वीकृत अस्थायी पदों में से 549 पदों पर ही मानक प्रक्रिया का पालन किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार की कार्रवाई ने इस पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। अब माना जा रहा है कि भविष्य में मंत्री कार्यालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति और तैनाती को लेकर नियमों का और कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
वहीं, 550 से ज्यादा कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेजे जाने के बाद मंत्रालयों में कामकाज पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार की प्राथमिकता नियमों के मुताबिक प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना बताई जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस कदम को उनकी सख्त प्रशासनिक शैली से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल इस एक्शन ने महाराष्ट्र के सरकारी तंत्र में एक बड़ा संदेश जरूर दिया है कि मंत्री कार्यालयों में काम करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और वेरिफिकेशन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में सरकार की यह सख्ती नियुक्तियों और अस्थायी तैनाती से जुड़े दूसरे मामलों तक पहुंचती है या नहीं, इस पर भी सबकी नजर रहेगी।


