भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारत और तेहरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत को अपने पुराने दोस्त ईरान के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद भारत-ईरान संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर ऐसे समय में जब मध्य पूर्व की स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है और ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
मौलाना यासूब अब्बास ने शुक्रवार को नई दिल्ली और तेहरान के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंधों की तारीफ की। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के भारत दौरे को बेहद अहम बताया। उनके मुताबिक, BRICS समिट में शामिल होने के लिए ईरानी राष्ट्रपति का भारत आना दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों की मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने कहा कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब ईरान पर भू-राजनीतिक दबाव काफी बढ़ा हुआ है, इसलिए इसकी अहमियत और भी ज्यादा हो जाती है।
अब्बास ने भारत सरकार से ईरान के साथ अपने संबंधों को मजबूती से आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच संबंध सिर्फ मौजूदा परिस्थितियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते रहे हैं। ऐसे में मुश्किल दौर में पुराने सहयोगी के साथ खड़े रहना जरूरी है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में भारत की कूटनीतिक भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
मौलाना यासूब अब्बास ने अपने बयान में मध्य पूर्व के बदलते समीकरणों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान के खिलाफ कई देश खड़े नजर आ रहे हैं और मध्य पूर्व के कुछ तथाकथित इस्लामिक देश भी ईरान के खिलाफ हैं। ऐसे माहौल में ईरान के राष्ट्रपति का भारत आना उनके मुताबिक किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच विश्वास और कूटनीतिक रिश्तों की अहमियत से जोड़कर देखा।
उनके बयान में भारत की विदेश नीति और ईरान के साथ उसके रिश्तों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिखाई देता है। भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया के अलग-अलग देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ईरान के साथ भारत के रिश्ते व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और रणनीतिक हितों से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मौलाना यासूब अब्बास का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम और ईरान की भूमिका पर टिकी हुई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत को अपने पुराने दोस्त ईरान के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। अब उनके इस बयान ने भारत-ईरान संबंधों, BRICS और बदलती वैश्विक कूटनीति को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत अपनी कूटनीतिक भूमिका किस तरह निभाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।


