उत्तर प्रदेश के कानपुर से साइबर फ्रॉड का एक बेहद बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। कानपुर साइबर पुलिस ने फर्जी फर्मों और बैंक खातों के जरिए लोगों को निवेश के नाम पर ठगने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान सामने आई जानकारी ने पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी लोगों को निवेश के नाम पर ज्यादा मुनाफे का लालच देते थे। इसके बाद उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करने के लिए कहा जाता था। ठगी की रकम को कई बैंक खातों और फर्जी फर्मों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था, ताकि पैसों के असली स्रोत और नेटवर्क में शामिल लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
जांच के दौरान पुलिस को कुल 72 संदिग्ध बैंक खातों के बारे में जानकारी मिली है। इन खातों से देशभर में दर्ज साइबर ठगी की 86 शिकायतों का कनेक्शन सामने आया है। यानी यह मामला सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि इस नेटवर्क का दायरा कई राज्यों तक फैला हुआ होने की आशंका है।
सबसे चौंकाने वाली जानकारी कथित तौर पर इन बैंक खातों से हुए करीब 5,600 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन को लेकर सामने आई है। इतनी बड़ी रकम के लेनदेन की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रकम में कितनी राशि साइबर ठगी से जुड़ी थी और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 65 लाख 26 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी पुलिस के हाथ लगे हैं। इन उपकरणों में मौजूद डिजिटल जानकारी जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बैंक खातों और फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन फर्जी कंपनियों को किस तरह बनाया गया और इनके नाम पर बैंक खाते कैसे खोले गए।
आरोपियों का नेटवर्क किस तरह काम करता था, इसकी भी जांच की जा रही है। आशंका है कि गिरोह पहले लोगों को निवेश में मोटे मुनाफे का झांसा देता था और जब लोग उनके बताए खातों में पैसे भेज देते थे तो रकम को कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इससे पैसों की वास्तविक ट्रेल को छिपाने की कोशिश की जाती थी।
इस मामले में 86 साइबर ठगी की शिकायतों का सामने आना भी बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस अब इन सभी शिकायतों को आपस में जोड़कर देख रही है, ताकि गिरोह की पूरी कार्यप्रणाली और पीड़ितों की संख्या का पता लगाया जा सके।
फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 5,600 करोड़ रुपये के कथित ट्रांजैक्शन के पीछे पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके तार देश के किन-किन हिस्सों तक फैले हुए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के बाद साइबर फ्रॉड के इस नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।


